पाकिस्तान की लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही धोखाधड़ी की रणनीति अब अमेरिका में कम फायदेमंद साबित हो सकती है। एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बदलते अमेरिका में, जहां नीतियां ज्यादा लेन-देन आधारित और नेतृत्व-केंद्रित हो गई हैं, पाकिस्तान का यह तरीका अब सीमित असर वाला साबित हो सकता है।
सैनिक सहायता देने का संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप की उच्च-जोखिम वाली गाज़ा स्थिरीकरण परियोजना के तहत सैनिक सहायता देने का संकेत दिया है। लेकिन अगर ट्रंप को यह महसूस हुआ कि मुनीर भी पहले की तरह वादे तो कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं दे रहे, तो पाकिस्तान को मिलने वाली गारंटी तेजी से कमजोर पड़ सकती है।
कार्रवाईयों पर आंख मूंदने का रवैया
यूएई स्थित मीडिया आउटलेट अल अरबिया पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि आसिम मुनीर का उदय पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली सैन्य शासकों में से एक के रूप में ऐसे समय हुआ है जब ट्रंप गाजा के लिए एक इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (आईएसएफ) की योजना पर काम कर रहे हैं। इस संभावित समझौते में पाकिस्तान सैनिक देता है और बदले में अमेरिका आर्थिक मदद, राजनीतिक संरक्षण और घरेलू कार्रवाईयों पर आंख मूंदने का रवैया अपनाता है।
पाकिस्तान का पुराना रवैया
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह लेन-देन आधारित समझौता खासतौर पर इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अमेरिका की चुप्पी से जुड़ा है। लेकिन अब दबाव बढ़ने के साथ-साथ पाकिस्तान का पुराना रवैया (अधिक वादे और कम अमल) फिर सामने आने लगा है। कहा गया है कि मुनीर आईएसएफ को लेकर कदम पीछे खींच रहे हैं, जबकि भू-राजनीतिक फायदे पूरी तरह वसूलने की कोशिश कर रहे हैं।