पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। सरकार की आलोचना करते हुए संगठनों ने कहा कि इंटरनेट बंद करना, बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार करना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करना क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति के गंभीर रूप से बिगड़ने का संकेत है।
सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत
रिपोर्ट्स के अनुसार, पीओके के रावलाकोट शहर में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
यह तनाव उस समय बढ़ा जब पाकिस्तान प्रशासन ने 9 जून को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया।
अपनी बात रखने के अधिकार
इस फैसले की निंदा करते हुए इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने कहा कि किसी नागरिक संगठन को बिना किसी ठोस आधार के "आतंकी" घोषित करना और साथ ही पूरे क्षेत्र को बाहरी दुनिया से काट देना, लोगों के संगठन बनाने और अपनी बात रखने के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।
आईएचआरएफ ने आरोप लगाया कि 8 और 9 जून के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक महिला समेत 25 से अधिक लोगों की मौत हुई। संगठन ने यह भी कहा कि जेकेजेएएसी के विरोध प्रदर्शनों पर पहले भी मई 2024 और अक्टूबर 2025 में हिंसक कार्रवाई की जा चुकी है।
सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र में और अधिक लोगों की जान जा सकती है और लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन होता रहेगा। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान प्रशासन से हालात को शांत करने, संयम बरतने और बल प्रयोग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि बल का इस्तेमाल केवल अंतिम विकल्प के रूप में और आवश्यकता तथा अनुपात के सिद्धांतों के तहत ही होना चाहिए।
आजादी के अधिकार का उल्लंघन
एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की उप-क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा, "किसी जमीनी स्तर के संगठन को बिना स्पष्ट आधार के आतंकवादी घोषित करना और पूरे क्षेत्र में संचार व्यवस्था बंद कर देना मानवाधिकारों के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जेकेजेएएसी पर रोक लगाना गैर-कानूनी और संगठन बनाने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन है।"