पाकिस्तान में लाख लोकतंत्र की बात हो, लेकिन असली ताकत सेना के हाथ में ही होती है। इसमें आईएसआई का हाथ होता है। इसका एक और उदाहरण दुनिया के सामने आया है। पाकिस्तान में नया संविधान संशोधन की बात हो रही है।इसने मुनीर की ताकत को बढ़ाने का काम किया है। इस घोषणा के बाद ये साबित हो जाता है कि पाकिस्तानी सेना को अपनी आवाम से कोई लेनादेना नहीं है। उसे सिर्फ ताकत और पैसे चाहिए।
50 साल पीछे खौफनाक दौर में चला जाएगा
अगर यह संशोधन होता है तो पाकिस्तान का सुप्रीम कमांडर मुनीर हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो पाकिस्तान दोबारा से 50 साल पीछे पहुंच जाएगा। उस समय जियाउल हक का शासन था। जियाउल हक ने जुल्फिकार अली भुट्टो का का तख्तापलट किया था। इस दौरान पाकिस्तान कट्टरता और सैन्य हिंसा के आगे नतमस्तक हो गया। वह आज तक उबर नहीं सका।
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संविधान में 27वां संशोधन
पाकिस्तान सरकार अपने संविधान को लेकर बड़ा बदलाव करने वाली है। इस बदलाव के साथ पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर की ताकत में बढ़ा इजाफा होगा। पाकिस्तान सरकार अपने संविधान में 27वां संशोधन करने वाली है। इसे लेकर पाकिस्तानी संसद में इस सप्ताह मतदान होगा।
पाकिस्तान में न्यूक्लियर हथियारों की चाबी मुनीर के पास
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में बदलाव होगा। इससे मुनीर अधिक ताकतवर होगा। पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर थल, जल और वायु सेना के प्रमुख बनेंगे। इसका अर्थ है कि पाकिस्तान में न्यूक्लियर हथियारों की चाबी मुनीर के हाथों में चली जाएगी। 27वें संशोधन में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) के अध्यक्ष पद को खत्म किया जाएगा। इसकी जगह एक नए शक्तिशाली पद, रक्षा बलों के प्रमुख (सीडीएफ) को लाने की तैयारी है। सीडीएफ का पद सेनाध्यक्ष यानी कि मुनीर के पास जाने वाला है।