मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था पर दिखने लगा है। Pakistan के ऊर्जा मंत्री अली मलिक ने स्वीकार किया है कि देश के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार नहीं है। मौजूदा स्थिति में पाकिस्तान के पास केवल 5 से 7 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक बचा है, जबकि रिफाइंड ईंधन का भंडार लगभग 20 से 21 दिनों तक ही चल सकता है। ऐसे हालात में बिजली संकट और ब्लैकआउट का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है।
तेल आयात बिल ने बढ़ाई मुश्किल
प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के मुताबिक, Iran से जुड़े तनाव के कारण पाकिस्तान का तेल आयात बिल तेजी से बढ़ा है। पहले जहां हर हफ्ते करीब 300 मिलियन डॉलर का तेल आयात होता था, अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह उछाल देश की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
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भारत की तैयारी से तुलना
ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान लगातार India की रणनीति का जिक्र कर रहा है। भारत के पास 60 से 70 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, जिससे संकट के समय सप्लाई बनाए रखना संभव होता है। भारत ने आयात के स्रोतों में विविधता, रूस और अन्य देशों से खरीद और दीर्घकालिक योजना के जरिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की है, जिसका असर यह है कि वैश्विक तनाव के बावजूद घरेलू बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।
होर्मुज और वैश्विक असर
Strait of Hormuz में तनाव और संभावित नाकेबंदी ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इसका असर केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। हालांकि भारत जैसे देशों ने तैयारी के चलते स्थिति को संभाल रखा है, लेकिन पाकिस्तान में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
मध्यस्थता की कोशिशें तेज
ऊर्जा संकट से जूझते पाकिस्तान ने अब कूटनीतिक रास्ता भी अपनाया है। सरकार अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रही है, ताकि तनाव कम हो और तेल आपूर्ति सामान्य हो सके। लेकिन फिलहाल हालात बताते हैं कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो पाकिस्तान को गंभीर ऊर्जा संकट और संभावित ब्लैकआउट का सामना करना पड़ सकता है।