पाकिस्तान सुधरने का नाम नही ले रहा है और अपने आतंकी नेटवर्क को लगातार फैला रहा है। इस क्रम में जैश-ए-मोहम्मद ने ‘जमात-उल-मोमिनात’ नाम से महिला विंग बनाई है, जबकि लश्कर-ए-तैयबा ने समुद्री हमलों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तथाकथित ‘वॉटर विंग’ की स्थापना की है। यह जानकारी बुधवार को एक रिपोर्ट में दी गई।
पारंपरिक हवाला नेटवर्क का पूरक बन रहे
श्रीलंकाई मीडिया आउटलेट सीलोन वायर न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद के वित्तपोषण के तरीके अब डिजिटल हो गए हैं, जहां एन्क्रिप्टेड क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन पारंपरिक हवाला नेटवर्क का पूरक बन रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह किसी कमजोर होते नेटवर्क का अंतिम चरण नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा पोषित इस तंत्र के विकासात्मक कदम हैं।
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी
रिपोर्ट में पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी का जिक्र करते हुए कहा गया कि यह हमला पूरी तरह प्लान किया गया, सोचा-समझा और ठंडे दिमाग से अंजाम दिया गया था। यह हमला जम्मू-कश्मीर में सफल विधानसभा चुनावों के कुछ ही महीनों बाद हुआ था।
आतंकवाद सबसे बड़ी रुकावट बनता है
इस हमले से साफ है कि आतंकी संगठनों की रणनीति बदल रही है। अब उनका मकसद कश्मीर में बढ़ते पर्यटन को नुकसान पहुंचाना और वहां सामान्य हालात के दावों को चुनौती देना है। रिपोर्ट में कहा गया, “जब कोई इलाका स्थिर होने लगता है, निवेश बढ़ता है और पर्यटक घूमने आते हैं, तब आतंकवाद सबसे बड़ा रुकावट बनता है। पाकिस्तान की गहरी सत्ता (डीप स्टेट) यह बात लंबे समय से समझती रही है कि कश्मीर में भारत की आर्थिक प्रगति को रोकने का सबसे असरदार तरीका पारंपरिक सेना नहीं, बल्कि ऐसे आतंकी समूह हैं जिनसे सीधे जुड़ाव से इनकार किया जा सके।”
पाकिस्तान की सीधी भूमिका के सबूत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हमले में पाकिस्तान की सीधी भूमिका के सबूत पक्के हैं। रिपोर्ट में कहा गया, “28 जुलाई 2025 को भारतीय सुरक्षा बलों ने श्रीनगर के पास हरवान के जंगलों में पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार गिराया। उनकी पहचान से साफ हुआ कि एक आतंकी हबीब ताहिर था, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के खैगला के पास कोइयां गांव का रहने वाला था। दूसरा बिलाल अफजल था। ये कोई बेनाम या अकेले काम करने वाले लोग नहीं थे, बल्कि सीमा पार से आए और प्रशिक्षित थे।