Pakistan Trade Deficit : भारत में दिवाली से पहले शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक खबरों के बीच पड़ोसी पाकिस्तान के लिए व्यापार के मोर्चे पर चिंता बढ़ गई है। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में पाकिस्तान का व्यापार घाटा करीब 16 फीसदी बढ़ गया है। जुलाई से अक्टूबर के बीच आयात और निर्यात के बीच का अंतर बढ़कर 14.6 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें लगभग 2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी है।
26 अरब डॉलर तक पहुंचा आयात
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से अक्टूबर के दौरान पाकिस्तान का कुल आयात बढ़कर 26 अरब डॉलर हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि से करीब 2.9 अरब डॉलर यानी 12.5 फीसदी अधिक है। आयात में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह ऊर्जा से जुड़ा खर्च बताया जा रहा है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि ऊर्जा आयात बिल में वृद्धि के कारण पूरे वित्त वर्ष में देश का कुल आयात 71 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
निर्यात की रफ्तार नहीं पकड़ रही गति
आयात में तेजी के मुकाबले पाकिस्तान का निर्यात अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ रहा है। जुलाई से अक्टूबर के बीच कुल निर्यात 11.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि से करीब 890 मिलियन डॉलर यानी 8.5 फीसदी अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी रुपये में डॉलर के मुकाबले बड़ी गिरावट आने के बावजूद निर्यात में अपेक्षित उछाल नहीं आया। आमतौर पर देश का मासिक निर्यात 2.5 से 3 अरब डॉलर के आसपास रहता है, जबकि आयात औसतन 6.5 अरब डॉलर प्रति माह तक पहुंच रहा है।
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सरकार ने दी 88 अरब रुपये की राहत
निर्यात को बढ़ावा देने और विदेशी कर्जदाताओं पर निर्भरता कम करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने बजट में 88 अरब पाकिस्तानी रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया है। इसका बड़ा हिस्सा निर्यातकों, खासकर बड़े कारोबारियों को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के लिए रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस सहायता से निर्यात को गति मिलेगी। हालांकि, अब तक के आंकड़े बताते हैं कि आयात और निर्यात के बीच का अंतर लगातार चुनौती बना हुआ है।
60 अरब डॉलर के लक्ष्य पर संकट
पाकिस्तान सरकार ने चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं के निर्यात का लक्ष्य 34 अरब डॉलर रखा है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 30.8 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, वर्ष 2029 तक निर्यात को 60 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया गया है। योजना मंत्री अहसान इकबाल पहले कह चुके हैं कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के किसी नए कार्यक्रम से बचने के लिए निर्यात बढ़ाना जरूरी है। लेकिन मौजूदा रफ्तार और बढ़ते आयात के बीच यह लक्ष्य हासिल करना पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।