Panchak 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के दौरान कई तरह के शुभ और जरूरी कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। सितंबर 2026 में लगा पंचक अब समाप्त होने जा रहा है। पंचक का असर खत्म होने के बाद कई ऐसे काम किए जा सकते हैं, जिन्हें इन पांच दिनों के दौरान टालने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इस बार पंचक की शुरुआत 23 सितंबर 2026 की रात 9:57 बजे हुई थी। इसका समापन 28 सितंबर की सुबह 10:16 बजे हो रहा है। ऐसे में पंचक समाप्त होने के बाद निर्माण, यात्रा और मशीनरी से जुड़े कुछ कार्य दोबारा शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यहां एक जरूरी बात ध्यान रखने वाली है। पंचक खत्म हो रहा है, लेकिन इस समय पितृ पक्ष चल रहा है। इसलिए हर तरह के शुभ कार्यों के लिए यह समय अनुकूल नहीं माना जाता।
पंचक आखिर क्या होता है?
ज्योतिष में पंचक उस अवधि को कहा जाता है, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए पांच विशेष नक्षत्रों से गुजरता है। इनमें धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती शामिल हैं। इन पांच नक्षत्रों से चंद्रमा के गुजरने की अवधि को पंचक कहा जाता है। सामान्य तौर पर इसकी अवधि करीब पांच दिनों की होती है। धार्मिक मान्यताओं में इस दौरान कुछ खास कामों को रोकने या टालने की परंपरा है।
पंचक खत्म होने के बाद कौन से काम कर सकते हैं?
28 सितंबर को पंचक समाप्त होने के बाद उन कामों पर लगी रोक हट जाती है, जिन्हें पंचक के दौरान नहीं करने की मान्यता है। ऐसे में लोग घर से जुड़े निर्माण कार्य शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा मशीन, औजार या अन्य तकनीकी कामों की शुरुआत भी की जा सकती है। पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा को लेकर भी सावधानी बरती जाती है। पंचक समाप्त होने के बाद इस तरह की यात्रा को लेकर पंचक संबंधी बाधा नहीं रहती। इसी तरह चारपाई बनवाने जैसे कार्य भी किए जा सकते हैं।
लेकिन पितृ पक्ष के कारण अभी भी सावधानी जरूरी
पंचक समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि हर तरह के मांगलिक कार्यों के लिए समय अनुकूल हो गया है। फिलहाल पितृ पक्ष चल रहा है, जिसे हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उन्हें याद करने की अवधि माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नए कारोबार की शुरुआत जैसे मांगलिक आयोजनों को टालना बेहतर माना जाता है।
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पितृ पक्ष में किन बातों का रखें ध्यान?
पंचक की समाप्ति के बाद निर्माण और अन्य जरूरी कार्यों से जुड़ी रोक भले ही हट जाए, लेकिन पितृ पक्ष के नियम अलग हैं। इसलिए कोई भी बड़ा शुभ कार्य करने से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान से शुभ तिथि की जानकारी लेना उचित माना जाता है। वहीं, पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना प्रमुख माना गया है। नए वाहन, आभूषण या नए कपड़े जैसी खरीदारी को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं और पंचांग मत हो सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में स्थानीय मान्यता को ध्यान में रखना चाहिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।