
हिंदू पंचांग के अनुसार 17 सितंबर 2025 का दिन बेहद खास है। आज दो पवित्र पर्व—इंदिरा एकादशी और विश्वकर्मा जयंती—एक ही दिन मनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आज के दिन पंचांग में 5 विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए बेहद अनुकूल माने जाते हैं। ऐसे में यह दिन धार्मिक आस्था और कर्म के दृष्टिकोण से अत्यंत फलदायी है।
इंदिरा एकादशी का महत्व
इंदिरा एकादशी, पितृपक्ष के दौरान आने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्रती को पुण्य फल मिलता है। इस व्रत के माध्यम से पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा जयंती को देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की आराधना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कारीगर, इंजीनियर, तकनीकी और निर्माण कार्यों से जुड़े लोग अपने औजारों, मशीनों और उपकरणों की पूजा करते हैं। यह दिन उद्योग-धंधों में सफलता और उन्नति की कामना के लिए समर्पित है।
आज बन रहे हैं ये 5 शुभ संयोग
इंदिरा एकादशी व्रत – पितृ तर्पण और मोक्ष हेतु विशेष।
विश्वकर्मा पूजा – तकनीकी और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों के लिए शुभ।
सिद्धि योग – कार्यों में सफलता दिलाने वाला योग।
पुनर्वसु नक्षत्र – शुभ आरंभ और नए कार्यों के लिए अनुकूल।
बुधवार का दिन – बुद्धि, वाणी और व्यापार के लिए शुभ।
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
पूजा का समय: सुबह 6:30 बजे से 8:00 बजे तक
व्रत पारण का समय (अगले दिन): 18 सितंबर को सुबह 6:10 बजे से 8:30 बजे तक
विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 9:15 से दोपहर 12:00 बजे तक
धार्मिक और कर्मशील दृष्टिकोण
17 सितंबर 2025 का दिन आध्यात्मिक, धार्मिक और कर्मशील दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब इंदिरा एकादशी और विश्वकर्मा पूजा जैसे पर्व एक साथ आएं और पंचांग में शुभ योग बनें, तो यह दिन पुण्य प्राप्ति और सफलता के लिए एक श्रेष्ठ अवसर बन जाता है। इस शुभ दिन का पूरा लाभ उठाएं – व्रत करें, पूजन करें और सद्कर्मों से दिन को सार्थक बनाएं।