
भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार सुबह 4.15 बजे निधन हो गया. बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे. उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में संपन्न किया जाएगा.
कुछ दिन पहले बीएचयू अस्पताल में कराया गया भर्ती
मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बीएचयू अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, बाद में सर सुंदर लाल अस्पताल रेफर कर दिया गया. कार्डियक और चेस्ट संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें उपचार दिया गया. डॉक्टरों ने हालत सुधरने पर डिस्चार्ज भी कर दिया था लेकिन वे हीमोग्लोबिन की कमी और त्वचा संबंधी समस्याओं से भी परेशान चल रहे थे.
संगीत साधना का संघर्षमय जीवन
आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को हुआ था. हालांकि उनकी कर्मभूमि बनारस रही है. ठाकुर जयदेव सिंह से संगीत शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने आजीवन शास्त्रीय और उपशास्त्रीय गायन को समर्पित कर दिया. उनके निधन को संगीत जगत ने अपूरणीय क्षति बताया है. संगीतज्ञ डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल था.
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने भी दी भावभीनी श्रद्धांजलि
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि पंडित जी ने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाया और भारतीय परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 2014 में वे वाराणसी से मोदी के प्रस्तावक भी रहे थे.
वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन इस कला के उत्थान को समर्पित कर दिया.
2010 और 2020 में पद्म विभूषण से किया गया सम्मानित
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने कई उपशास्त्रीय और शास्त्रीय रचनाओं को नई ऊंचाइयां दीं. उनका होली गीत “खेले मसाने में होरी दिगंबर” बेहद लोकप्रिय रहा, जो आज भी होली का अहम हिस्सा माना जाता है. इस गीत ने उन्हें घर-घर तक पहचान दिलाई. भारतीय शास्त्रीय संगीत में अप्रतिम योगदान देने के लिए उन्हें 2010 और 2020 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. इससे पहले वे पद्म भूषण से भी अलंकृत किए जा चुके थे. उनकी संगीत साधना ने बनारस घराने की परंपरा को जीवित और समृद्ध बनाए रखा.