उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक बार फिर आदमखोर भेड़ियों का आतंक देखने को मिला है. महसी तहसील के गढ़ी गांव में 2 साल के आयुष नामक बच्चे को उसकी मां की गोद से उठाकर ले जाया गया. काफी खोजबीन के बाद भी रातभर बच्चे का पता नहीं चला, लेकिन सुबह गन्ने के खेत में उसका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ. बच्चे के शरीर पर भेड़िये के दांत और पंजे के निशान मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत भेड़िये के हमले में हुई है.
डीएफओ ने दी जानकारी
घटना के बाद वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) अजीत सिंह ने घटनास्थल से सियार के पगमार्क मिलने की बात कही है, जिससे उन्होंने भेड़िये के हमले की संभावना को नकारा है. हालांकि, स्थानीय विधायक सुरेश्वर सिंह ने डीएफओ के बयान को असंवेदनशील बताते हुए उन्हें बहराइच से हटाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जब वह प्रभावित क्षेत्र की ओर आ रहे थे, तो वन विभाग की गाड़ियां रास्ते में खड़ी मिलीं और कर्मचारी उनमें बैठे थे, जबकि उन्हें मौके पर जाकर घटना की जांच करनी चाहिए थी.
9 महीने पहले भी 10 मासूमों की हुई थी मौत
इससे पहले, लगभग 9 महीने पहले इसी महसी इलाके में आदमखोर भेड़ियों के हमले में एक महिला समेत 10 मासूमों की जान चली गई थी. उस दौरान भी विधायक सुरेश्वर सिंह ने ग्रामीणों को सुरक्षा देने के लिए बंदूक लेकर स्वयं रात-रात जागकर गश्त की थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भेड़िया प्रभावित महसी इलाके का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और उन्हें सरकारी सहायता प्रदान की थी. सीएम ने आश्वासन दिया था कि जब तक सारे भेड़िए पकड़ नहीं लिए जाते, तब तक वन विभाग क्षेत्र में काम करता रहेगा.
रातभर पहरेदारी कर रहे लोग
अब एक बार फिर इलाके में हुई इस नई घटना से लोग सहमे हैं और आदमखोर भेड़ियों के हमले की डरावनी याद ताजा हो गई है. स्थानीय लोग रातभर पहरेदारी कर रहे हैं और बच्चों को अकेला नहीं छोड़ रहे हैं. वन विभाग की टीमों ने ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से भेड़ियों की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है.