
दशहरे के बाद आने वाली पापांकुशा एकादशी हिन्दू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। यह एकादशी न केवल व्रत-उपवास का दिन है, बल्कि आत्मशुद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का एक दिव्य अवसर भी है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने वाला व्यक्ति यमलोक के भय से मुक्त हो जाता है और भगवान विष्णु की कृपा से उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है।
पापांकुशा एकादशी व्रत कब
पापांकुशा एकादशी का व्रत दशहरा के अगले दिन यानी शुक्रवार 3 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा. एकादशी की शुरुआत 2 अक्टूबर को शाम 7:10 से हो जाएगी, जिसका समापन 3 अक्टूबर को शाम 6:32 पर होगा. उदया तिथि के अनुसार एकादशी का पूजन और उपवास 3 अक्टूबर को करना ही श्रेष्ठ होगा.
पापांकुशा एकादशी व्रत का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि, एकादशी व्रत के समान कोई व्रत नहीं होता है. खासकर आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी के दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से यमलोक की यातनाओं का कष्ट नहीं भोगना पड़ता है. अगर आप मृत्यु के बाद यमलोक के दर्शन नहीं करना चाहते तो इस एकादशी का व्रत जरूर करें.
भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा
पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है. इस दिन विधि विधान से भगवान विष्णु का पूजन करने, दान-पुण्य करने, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने, रात्रि जागरण करने और अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने से व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है. पद्म पुराण के अनुसार पापांकुशा एकादशी व्रत से अक्षयपुण्य फल की प्राप्ति होती है, हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ सूर्ययज्ञ के समान फल मिलता है. पापांकुशा एकादशी का व्रत स्वर्गलोक में स्थान भी दिलाता है.