Parashar Joshi Umpire : पुणे के पराशर जोशी की कहानी काफी अलग है। कभी वह इंडियन आइडल के मंच पर अपनी आवाज से पहचान बनाने का सपना देख रहे थे। आज वही पराशर क्रिकेट के मैदान पर बड़े फैसले लेने वाले अंपायर बन चुके हैं। अब उनके करियर में एक और बड़ा मौका आया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अंपायर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत उन्हें ऑस्ट्रेलिया में अंपायरिंग की जिम्मेदारी मिली है। इस कार्यक्रम के जरिए दोनों देशों के अंपायर एक-दूसरे के घरेलू टूर्नामेंट में काम करेंगे। पराशर के लिए यह मौका उनके लंबे सफर में एक अहम पड़ाव है।
इंडियन आइडल तक पहुंचने के लिए किया संघर्ष
पराशर जोशी को बचपन से ही संगीत का शौक था। उन्होंने गायकी में पहचान बनाने के लिए कई बार कोशिश की। शुरुआती तीन साल तक उन्हें ऑडिशन में निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2008 में उन्होंने इंडियन आइडल के चौथे सीजन में हिस्सा लिया और पियानो राउंड तक पहुंचे। हालांकि, उनका सफर आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बाद भी संगीत से उनका जुड़ाव बना रहा। लेकिन धीरे-धीरे क्रिकेट उनके करियर का मुख्य रास्ता बन गया।
क्लब क्रिकेट से अंपायरिंग तक पहुंचे
संगीत के साथ पराशर का क्रिकेट से भी गहरा नाता था। वह क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलते थे। बाद में उन्होंने अंपायरिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने खेल के नियमों और मैदान पर फैसले लेने की बारीकियों पर काम किया। उनकी मेहनत रंग लाई और साल 2015 में बीसीसीआई ने उन्हें अपने आधिकारिक अंपायर पैनल में शामिल कर लिया। इसके बाद उन्हें घरेलू क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंट में लगातार जिम्मेदारियां मिलने लगीं।
घरेलू क्रिकेट में लंबा अनुभव
पराशर अब तक भारत के कई बड़े घरेलू टूर्नामेंट में अंपायरिंग कर चुके हैं। वह रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी के 19 प्रथम श्रेणी मैचों में मैदान पर अंपायर की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा विजय हजारे ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी के 32 लिस्ट-ए मुकाबलों में भी जिम्मेदारी संभाली है। टी20 प्रारूप में उनके नाम 40 मैचों का अनुभव है। आईपीएल और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट में भी वह अंपायरिंग कर चुके हैं।
ब्रिस्बेन में पहली बड़ी चुनौती
ऑस्ट्रेलिया में पराशर का कार्यक्रम 11 से 14 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर क्वींसलैंड और तस्मानिया के बीच शेफील्ड शील्ड का चार दिवसीय मुकाबला खेला जाएगा। पराशर इस मैच में अंपायरिंग करेंगे। शेफील्ड शील्ड ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख घरेलू प्रथम श्रेणी प्रतियोगिता है। इस स्तर पर अंपायरिंग करना उनके लिए नए माहौल में काम करने और अनुभव बढ़ाने का अच्छा अवसर होगा।
तीन मैचों में संभालेंगे जिम्मेदारी
पराशर का ऑस्ट्रेलिया दौरा एक मैच तक सीमित नहीं रहेगा। 16 नवंबर को गाबा में क्वींसलैंड और तस्मानिया के बीच होने वाले वनडे कप मुकाबले में भी वह मैदान पर अंपायर होंगे। इसके बाद 22 से 25 नवंबर तक सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड के शेफील्ड शील्ड मैच में जिम्मेदारी संभालेंगे। इस तरह उन्हें ऑस्ट्रेलिया में तीन घरेलू मुकाबलों में काम करने का मौका मिलेगा। यह कार्यक्रम भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड के बीच अंपायरों के अनुभव को बढ़ाने की पहल का हिस्सा है।
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दूसरी ओर भारत आएंगे ऑस्ट्रेलियाई अंपायर
इस कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर भी भारत में रणजी ट्रॉफी के दो मैचों में अंपायरिंग करेंगे। वह 18 से 21 अक्टूबर तक दिल्ली और गुजरात के मुकाबले में, जबकि 26 से 29 अक्टूबर तक मुंबई और हरियाणा के मैच में जिम्मेदारी संभालेंगे। दोनों देशों के अंपायरों को अलग-अलग परिस्थितियों और घरेलू क्रिकेट के माहौल में काम करने का मौका मिलेगा। पराशर के लिए यह सफर खास है, क्योंकि इंडियन आइडल के मंच से शुरू हुई उनकी पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग के अनुभव तक पहुंच रही है।