
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2025 में परिवर्तिनी एकादशी को लेकर लोगों के मन में यह सवाल है कि यह व्रत 3 सितंबर को मनाया जाएगा या 4 सितंबर को। पंचांग के अनुसार, इस बार परिवर्तिनी एकादशी व्रत 4 सितंबर 2025, बुधवार को रखा जाएगा।इस एकादशी का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु शेषनाग की शैया पर करवट बदलते हैं। इसलिए इसे परिवर्तिनी (जिसका अर्थ है 'बदलाव लाने वाली') एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी, जयन्ती एकादशी और डोल ग्यारस जैसे नामों से भी जाना जाता है।
व्रत और पूजा का महत्व
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और व्रत कथा सुनने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से चातुर्मास के दौरान आता है, जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में होते हैं। इस दिन से उनके करवट बदलने के कारण सृष्टि में भी बदलाव की शुरुआत मानी जाती है। मान्यता है कि इस एकादशी के दिन व्रत रखने से पुण्य का फल मिलता है, जो अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर होता है। खासकर वैवाहिक सुख, मानसिक शांति और आर्थिक समृद्धि की कामना से इस दिन व्रत करना बहुत शुभ माना गया है।
पारंपरिक नियम और विधि
इस दिन भक्त उपवास करते हैं, भगवान विष्णु का पूजन करते हैं और रातभर जागरण करते हैं। तुलसी दल अर्पण, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, और व्रत कथा श्रवण इस दिन की प्रमुख धार्मिक क्रियाएं हैं। परिवर्तिनी एकादशी 2025 में 4 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। यह एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि अध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। व्रत, उपवास, और भक्ति भाव से भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में शुभ परिवर्तन आते हैं। अगर आप भी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन चाहते हैं, तो परिवर्तिनी एकादशी का यह शुभ अवसर अवश्य साधें।