संसद के बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। 118 से अधिक सांसदों के समर्थन वाले इस कदम को असाधारण बताया जा रहा है। दूसरी ओर, संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के बाद दोपहर से सुचारू संचालन की कोशिशें भी जारी हैं।
विपक्ष का बड़ा कदम, नोटिस सौंपा गया
बजट सत्र के बीच विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दाखिल कर दिया है। नियमों के तहत 100 से अधिक सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जिसे विपक्ष ने पूरा करने का दावा किया है। प्रस्ताव पर कई वरिष्ठ सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जबकि कुछ दलों ने इससे दूरी बनाए रखी है। इस घटनाक्रम ने संसद के भीतर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
स्पीकर की ओर से सचिवालय को निर्देश
सूत्रों के मुताबिक स्पीकर ने अपने खिलाफ आए नोटिस को लेकर लोकसभा सचिवालय को इसकी जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है। प्रस्ताव की वैधता, सांसदों के हस्ताक्षर और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इसी बीच सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन नियम और परंपरा के तहत ही चलेगा, जबकि विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है।
सदन में हंगामा, बार-बार स्थगित हुई कार्यवाही
दिनभर चले हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर देने की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार ने चर्चा जारी रखने की बात कही। बैठकें और आपसी संवाद के दौर भी चले, जिनके बाद दोपहर से सदन सुचारू चलाने के संकेत दिए गए। हालांकि तनावपूर्ण माहौल के कारण स्थिति लगातार बदलती रही।
विपक्षी नेताओं के तीखे बयान
सदन के भीतर और बाहर विपक्षी सांसदों के बयान चर्चा में रहे। कुछ नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए बोलने का अवसर न मिलने पर नाराजगी जताई, तो कुछ ने स्पीकर के रवैये पर सवाल उठाए। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से यह कहा गया कि कार्यवाही बाधित करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है और चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।
आगे क्या होगा, सबकी नजर फैसले पर
अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि अविश्वास प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाता है या नहीं और आगे की संसदीय प्रक्रिया किस दिशा में जाती है। बजट पर चर्चा, विपक्ष की रणनीति और सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में संसद के एजेंडे को तय करेगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र लंबे समय तक चर्चा और टकराव का केंद्र बना रह सकता है।