संसद परिसर में उस वक्त माहौल गरमा गया जब कांग्रेस सांसदों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आमने-सामने आ गए। कभी करीबी रहे दोनों नेताओं के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। राहुल गांधी के तंज और बिट्टू के पलटवार ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना जताई जा रही है।
संसद के मकर द्वार पर आमना-सामना
घटना संसद के मकर द्वार के पास हुई, जहां कांग्रेस सांसद हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान राहुल गांधी वहां पहुंचे और सांसदों की सराहना करते हुए आगे बढ़े। तभी केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी सामने आ गए। राहुल गांधी ने उन्हें देखते ही हल्के अंदाज में हाथ मिलाने की कोशिश की, लेकिन बिट्टू ने हाथ आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद माहौल अचानक तल्ख हो गया।
‘गद्दार दोस्त’ टिप्पणी से बढ़ा विवाद
राहुल गांधी ने बिट्टू को संबोधित करते हुए “माय ट्रेटर फ्रेंड” यानी ‘मेरा गद्दार दोस्त’ कहा। यह टिप्पणी सुनते ही बिट्टू ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को “देश का दुश्मन” करार दिया और कहा कि उनका ऐसे लोगों से कोई लेना-देना नहीं है। दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक तीखी नोकझोंक चलती रही, जिसका वीडियो भी सामने आया है।
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू
रवनीत सिंह बिट्टू तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा में प्रवेश किया और 2014 व 2019 में लुधियाना से जीत दर्ज की। खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाने वाले बिट्टू 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। हालांकि उस चुनाव में उन्हें करीब 20 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा, बावजूद इसके बाद में उन्हें केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
राजनीतिक सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि
बिट्टू का राजनीतिक जीवन निजी त्रासदियों से भी जुड़ा रहा है। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद 20 वर्ष की आयु में उनके दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में चंडीगढ़ में हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू सक्रिय राजनीति में आए और तेजी से उभरे।
पुराना विवाद फिर चर्चा में
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और बिट्टू के बीच बयानबाजी हुई हो। सितंबर 2024 में बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने का आरोप लगाते हुए तीखी टिप्पणी की थी। उस समय भी उनके शब्दों ने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल मचाई थी। मौजूदा टकराव ने एक बार फिर दोनों नेताओं के रिश्तों और सियासी समीकरणों को सुर्खियों में ला दिया है।