20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 यानी परिसीमन बिल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहेगा। पिछले बजट सत्र में आवश्यक बहुमत नहीं मिलने से यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। हालांकि, बीते कुछ महीनों में संसद के राजनीतिक समीकरण बदलने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में नजर इस बात पर होगी कि क्या इस बार सरकार आवश्यक समर्थन जुटा पाएगी या विपक्ष फिर इसे रोकने में सफल रहेगा।
बजट सत्र में क्यों नहीं मिल सका था आवश्यक समर्थन
अप्रैल 2026 में लोकसभा में इस संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था, लेकिन सरकार निर्धारित संख्या तक नहीं पहुंच सकी और विधेयक पारित नहीं हो पाया। उस समय कई प्रमुख विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था, जिसके कारण सरकार को जरूरी समर्थन नहीं मिल सका।
क्या है 131वां संशोधन विधेयक
प्रस्तावित विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन प्रक्रिया के बाद महिला आरक्षण लागू करने के लिए संवैधानिक व्यवस्था तैयार करने का प्रावधान है। इसके साथ ही राज्यों की जनसंख्या के आधार पर संसदीय सीटों के पुनर्निर्धारण का सिद्धांत लागू करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है। इसी बिंदु को लेकर कई राज्यों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
बदले राजनीतिक समीकरणों ने बढ़ाई सरकार की उम्मीद
पिछले सत्र के बाद संसद में दलों की संख्या और समर्थन के समीकरण बदलने के दावे सामने आए हैं। विभिन्न दलों के कुछ सांसद सत्ता पक्ष के समर्थन में आने की चर्चा है, जिससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संख्या पहले की तुलना में बढ़ी बताई जा रही है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रीय दलों ने भी कुछ शर्तों के साथ विधेयक पर समर्थन की संभावना से इनकार नहीं किया है। ऐसे हालात में सरकार इस बार आवश्यक बहुमत के करीब पहुंचने की कोशिश में है।
क्षेत्रीय दलों का रुख रहेगा सबसे अहम
कई क्षेत्रीय दलों ने स्पष्ट किया है कि वे अंतिम निर्णय विधेयक का संशोधित मसौदा देखने के बाद ही लेंगे। कुछ दलों ने सभी राज्यों में सीटों की समान वृद्धि जैसी शर्तों का उल्लेख किया है। दूसरी ओर दक्षिण भारत के कई राज्यों की चिंता यह है कि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से उनके संसदीय प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए इन आशंकाओं का समाधान करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मानसून सत्र में किस पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
मानसून सत्र के दौरान सर्वदलीय बैठक, राजनीतिक दलों की रणनीति और संसद में होने वाली चर्चा पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी। यदि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है तो संविधान संशोधन विधेयक आगे बढ़ सकता है, वहीं विपक्ष की कोशिश होगी कि आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा न होने पाए। ऐसे में यह सत्र केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों की चुनावी और संसदीय राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।