Parliament Monsoon Session : संसद के मानसून सत्र के अब केवल चार दिन बचे हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी तस्वीर साफ नहीं है। महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी चंदे से जुड़े विधेयकों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं।
महिला आरक्षण पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। विपक्ष का एक हिस्सा चाहता है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग करके लागू करने पर विचार किया जाए।
परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंता
परिसीमन का सीधा संबंध भविष्य में लोकसभा सीटों के पुनर्गठन से है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक दल इसके संभावित प्रभाव को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं। सोमवार को एनसीपी (शरद पवार गुट) के सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी इसी राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विपक्ष के विरोध के बीच अमित शाह देंगे जवाब
संसद में छात्र प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी गरम है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं, हालांकि सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारू रखने की अपेक्षा जताई है।
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आखिरी दिनों में क्या होगा सबसे बड़ा फैसला
अब निगाहें संसद के बचे हुए चार दिनों पर हैं। प्रमुख विधेयकों को लेकर राजनीतिक सहमति बनती है या गतिरोध जारी रहता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे केवल संसद की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी इनका असर पड़ सकता है।