लोकसभा में गुरुवार को स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया। इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि स्पीकर ओम बिरला ने सदन में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की है। हालांकि, भाजपा का कहना है कि यह प्रस्ताव राजनीति से प्रेरित है और इसका कोई आधार नहीं है।
इन हालात में स्पीकर को पद छोड़ना पड़ सकता है
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का परिणाम क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन प्रक्रिया के अनुसार, यह प्रस्ताव 50 सांसदों के समर्थन के साथ चर्चा के लिए आ सकता है। अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ सकता है।
अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया
नोटिस में कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है। 50 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। प्रस्ताव पर चर्चा होती है, जिसमें स्पीकर खुद सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ सकता है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मंगलवार को कहा कि विपक्ष को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने को मजबूर होना पड़ा है। इस तरह से संविधान और संसदीय सदन की गरिमा को सुरक्षित रखा जा सकता है। गोगोई ने बिरला पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष के नेता को अपने विचार रखने की इजाजत नहीं दी जाती है।
नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका दिया
असम के जोरहाट से सांसद गोगोई ने जानकारी दी कि फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर आभार प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता ने करीब 20 बार रोका गया। उन्होंने कहा "स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया। जब वह अहम मुद्दों पर बात करने का प्रयास कर रहे थे तो लगातार बाधा डाली गई।