Budget Session Live: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया। पहले ही दिन सदन में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनती दिखी। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव जैसे विषयों ने संसद का माहौल गरमा दिया। सत्र के दौरान दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष की रणनीतियां साफ तौर पर सामने आईं।
पहले चरण में भी रहा था राजनीतिक टकराव
बजट सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चला था। इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा हुई। इसी चरण में विपक्षी दलों ने लोकसभा महासचिव को अविश्वास प्रस्ताव सौंपते हुए लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की मांग की थी। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और वामपंथी दलों समेत कई विपक्षी दलों के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसमें शामिल नहीं हुई थी।
पश्चिम एशिया संघर्ष
लोकसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की स्थिति का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार ऊर्जा बाजारों की उपलब्धता, लागत और जोखिमों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है और इसी को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएंगे।
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नारेबाजी के बीच बयान
विदेश मंत्री के बयान के दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी और कई सांसद सदन के वेल तक पहुंच गए। इस हंगामे के कारण सदन का माहौल काफी शोरगुल वाला हो गया। लगातार बाधा के चलते लोकसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी और इसे बाद में दोबारा शुरू करने का फैसला लिया गया।
स्पीकर पर भरोसा
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा सांसद अरुण गोविल ने विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों को लोकसभा अध्यक्ष पर पूरा भरोसा है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत आरोप लगा रहा है, लेकिन इससे सदन की कार्यप्रणाली पर कोई असर नहीं पड़ेगा।