लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव अपने समर्थकों के साथ कुलपति कार्यालय पहुंची। इस दौरान वीसी चैंबर के बाहर हुई धक्का-मुक्की में दरवाजे की सिटकनी टूट गई और दफ्तर का कंप्यूटर नीचे गिर गया। इस हंगामे के तुरंत बाद अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर संस्थान की एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी, जिसमें महिला डॉक्टरों के मानसिक उत्पीड़न और लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रशासन द्वारा लीपापोती करने के संगीन आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर केजीएमयू प्रशासन ने इस कृत्य को गुंडागर्दी करार देते हुए अपर्णा यादव और उनके समर्थकों के खिलाफ चौक थाने में तहरीर दी है। इसके बाद पुलिस ने घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।
वीसी चैंबर में धक्का-मुक्की और तोड़फोड़
जानकारी के अनुसार, अपर्णा यादव पहले महिला आयोग के दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली थीं, लेकिन अचानक वे समर्थकों के साथ केजीएमयू पहुंच गईं। जब अपर्णा वहां पहुंचीं तो कुलपति का चैंबर बंद था। इससे नाराज समर्थकों ने दरवाजे को धक्का देना शुरू कर दिया, जिससे उसकी सिटकनी टूट गई. हंगामे के दौरान चैंबर का कंप्यूटर गिर गया और गमले टूट गए। केजीएमयू प्रशासन ने इसे गुंडागर्दी करार दिया है।
अपर्णा यादव के गंभीर आरोप और सवाल-
केजीएमयू में महिला डॉक्टरों का मानसिक उत्पीड़न क्यों हो रहा है?
धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रशासन सख्त क्यों नहीं है?
विशाखा कमेटी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कर रही है?
क्या केजीएमयू प्रशासन सरकार को अंधेरे में रख रहा है?
मोदी-योगी के स्वस्थ भारत के सपने को केजीएमयू क्यों ध्वस्त कर रहा है?
केजीएमयू की लापरवाही की वजह से मामला इतना बढ़ा
इससे पहले अपर्णा यादव ने कहा था कि क्या अब महिला आयोग को भी कहीं पहुंचने से पहले इसके बारे में सूचना देनी पड़ेगी। हमारी इससे पहले जब बात हुई थी तो हमने कहा था कि हम किसी दिन आएंगे। क्या हमें औचक निरीक्षण करने का हक नहीं है। केजीएमयू प्रशासन के लापरवाही की वजह से ही यह मामला इतना बढ़ गया। शुरुआत में ही अगर पीड़ित महिला की सुनवाई हो जाती तो उसे पहले ही इंसाफ मिल जाता. महिला का इतना शोषण नहीं होता।
अपर्णा यादव ने कहा था कि केजीएमयू प्रशासन ने पीड़ित महिला डॉक्टर को विशाखा समिति के तहत जांच करने का श्वसन दिया था, लेकिन उसे जांच को तोड़ मरोड़ कर किया गया। जिससे पीड़िता को इंसाफ नहीं मिला था। इसके बाद पिता ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया।
कुछ समय पहले ही इनके डॉक्टर से बात हुई थी
अपर्णा यादव ने कहा था कि अगर आप में से कोई कुलपति के संपर्क में है तो आप उन्हें बुलाए यहां आकर आमने-सामने बात करते हैं। सांमजस्य स्थापित होगा। केजीएमयू प्रशासन यह बात कैसे कह सकता है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है कि मैं यहां पहुंचने वाली हूं। कुछ समय पहले ही इनके डॉक्टर से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था हम तो आपको लेने के लिए आ रहे हैं। सभी को खबर थी। अब बात बिगड़ गई है। अब इस पूरे मामले की जानकारी राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक मैं खुद पहुंचाऊंगी।
सीएम योगी को सौंपी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट
अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री को केजीएमयू की आंतरिक स्थिति से अवगत कराया। उनकी रिपोर्ट में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया गया है। संस्थान में महिला डॉक्टरों और छात्राओं का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। धर्मांतरण और उत्पीड़न जैसे मामलों में विशाखा कमेटी की जांच निष्पक्ष नहीं है। लव जिहाद जैसे गंभीर मुद्दों पर केजीएमयू प्रशासन सख्त रुख अपनाने के बजाय लीपापोती कर रहा है.
कुलपति की दो-टूक
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने अपर्णा यादव के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा यूनिवर्सिटी परिसर में तोड़फोड़ और गुंडई बिल्कुल स्वीकार नहीं है। हम अपनी सुरक्षा के लिए शासन से बात करेंगे। हमने लव जिहाद मामले में विशाखा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है और आरोपी डॉक्टर को बर्खास्त करने की संस्तुति भी भेज दी है।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह और चीफ प्रॉक्टर आरएएस कुशवाहा ने स्पष्ट किया है कि कैंपस में उत्पात मचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। चौक थाने में अपर्णा यादव और उनके 25-30 समर्थकों के खिलाफ तहरीर दी गई है। केजीएमयू शिक्षक संघ ने भी इस घटना पर कड़ा विरोध जताया है और कैंडल मार्च निकालने का निर्णय लिया है। डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया तहरीर के आधार पर जांच कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।