Parvinder Awana BCCI Selector : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पूर्व तेज गेंदबाज परविंदर अवाना को जूनियर पुरुष चयन समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। कभी भारतीय टीम के लिए खेलने का सपना देखने वाले अवाना अब युवा खिलाड़ियों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी निभाएंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब भारतीय क्रिकेट में चयन समितियों में बदलाव को लेकर चर्चा चल रही है। बीसीसीआई के मुताबिक, क्रिकेट सलाहकार समिति ने चयनकर्ताओं की नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए थे। इसके बाद अवाना को अध्यक्ष चुना गया। उनके साथ कृष्णा दास, राकेश पटेल और एन अर्जुन यादव को भी चयन समिति में शामिल किया गया है। समिति के पांचवें सदस्य की नियुक्ति बाद में की जाएगी।
सिर्फ एक टी20 मैच से अंतरराष्ट्रीय सफर
परविंदर अवाना का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर ज्यादा लंबा नहीं रहा। साल 2012 में उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया था, लेकिन उन्हें टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद उसी साल इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उन्होंने भारत के लिए पदार्पण किया। अवाना ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में दो टी20 मैच खेले, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इसके बाद वह दोबारा भारतीय टीम में जगह नहीं बना सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित मौके मिलने के बावजूद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई और लगातार मेहनत से आगे बढ़ते रहे।
14 साल की उम्र में सिर से उठा पिता का साया
अवाना की सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है। वह उत्तर प्रदेश के नोएडा में पले-बढ़े। जब वह महज 14 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मां नोएडा प्राधिकरण में माली का काम करती थीं। उन्होंने मुश्किल हालात में बेटे की परवरिश की और उसके क्रिकेट खेलने के सपने को पूरा करने में मदद की। सीमित साधनों के बावजूद अवाना ने क्रिकेट में मेहनत जारी रखी। आज उन्हें जूनियर चयन समिति का अध्यक्ष बनाए जाने को उनके लंबे सफर की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
घरेलू क्रिकेट में 191 विकेट लेकर बनाई पहचान
अवाना ने दिल्ली की टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेला और अपनी गेंदबाजी से पहचान बनाई। उन्होंने 62 प्रथम श्रेणी मैचों में 191 विकेट लिए। वह इंडिया ए और रेस्ट ऑफ इंडिया की टीमों का भी हिस्सा रहे। घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने के मौके दिए। भले ही भारतीय टीम में उनका सफर छोटा रहा, लेकिन मैदान पर उनके अनुभव का दायरा काफी बड़ा रहा। तेज गेंदबाज के रूप में उन्होंने लंबे समय तक घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेला। अब चयन समिति में उनकी भूमिका युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन और उनकी क्षमता को परखने से जुड़ी होगी।
आईपीएल में भी दिखाया दम
परविंदर अवाना इंडियन प्रीमियर लीग में पंजाब किंग्स की ओर से भी खेल चुके हैं। वह 2012 से 2014 के बीच टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान उन्होंने 33 मैचों में 39 विकेट हासिल किए। आईपीएल में खेलने के अनुभव ने उन्हें बड़े मंच पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन को करीब से समझने का मौका दिया। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अवाना ने कोचिंग की दिशा में भी काम किया। उन्होंने दिल्ली की अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 टीमों के साथ जुड़कर युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया। इस अनुभव से उन्हें उभरते खिलाड़ियों की तकनीक और खेल को समझने का मौका मिला।
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अब युवा खिलाड़ियों का भविष्य संवारेंगे
जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में अवाना के सामने युवा प्रतिभाओं को पहचानने की अहम जिम्मेदारी होगी। घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और कोचिंग से जुड़े उनके अनुभव का इस्तेमाल युवा खिलाड़ियों के चयन में हो सकता है। भारतीय क्रिकेट में जूनियर स्तर की चयन प्रक्रिया इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसी स्तर से खिलाड़ी आगे बढ़कर देश की सीनियर टीम तक पहुंचने का सपना पूरा करते हैं। अवाना का सफर भी संघर्ष, घरेलू क्रिकेट और सीमित अंतरराष्ट्रीय मौकों से होकर गुजरा है। अब देखना होगा कि उनकी अगुवाई में जूनियर चयन समिति किन खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देती है।