बुधवार 4 फरवरी को महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र बारामती में अचानक हलचल तेज हो गई। पवार परिवार से जुड़े दो युवा चेहरे पार्थ पवार और जय पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार से बंद कमरे में मुलाकात की। यह बैठक बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान परिसर में हुई। बैठक की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया। हालांकि, बैठक के बाद किसी भी पक्ष ने आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बातचीत का दायरा काफी अहम था।
डेढ़ घंटे चली बातचीत, एजेंडा रहा गोपनीय
सूत्रों के मुताबिक यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसे लेकर अभी तक कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत सिर्फ पारिवारिक नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक थी। खासतौर पर आगामी जिला परिषद चुनावों को लेकर रणनीति पर मंथन होने की बात कही जा रही है। बारामती की सियासत में पवार परिवार की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है, ऐसे में इस मुलाकात को हल्के में नहीं लिया जा रहा।
एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि इस बैठक में एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी बातचीत हुई हो सकती है। अजित पवार के निधन के बाद से ही यह चर्चा तेज है कि पार्टी को फिर से एकजुट करने की कोशिशें हो रही हैं। पार्थ पवार और जय पवार की शरद पवार से मुलाकात को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। जिला परिषद चुनाव से पहले अगर दोनों गुट साथ आते हैं, तो इसका सीधा असर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ेगा।
अजित पवार के निधन के बाद बदले हालात
28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदले हैं। इस हादसे के तीन दिन बाद 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इससे पहले उन्हें पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया था। इस घटनाक्रम के बाद एनसीपी के भीतर नई सियासी गणनाएं शुरू हो गई हैं और पुराने मतभेद सुलझाने की कोशिशों की चर्चा भी तेज हो गई है।
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12 फरवरी को होने वाला था बड़ा ऐलान?
अजित पवार के निधन के बाद शरद पवार और एनसीपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया था कि पार्टी के दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत अंतिम चरण में थी। यहां तक कहा गया कि 12 फरवरी को इसको लेकर औपचारिक घोषणा की तारीख भी तय हो चुकी थी। ऐसे में अब पार्थ और जय पवार की यह मुलाकात उसी अधूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश मानी जा रही है।
फडणवीस के बयान पर शरद पवार की प्रतिक्रिया
एनसीपी एसपी गुट के प्रमुख शरद पवार ने इस पूरे मुद्दे पर साफ कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन चर्चाओं का हिस्सा नहीं थे, इसलिए उन्हें इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। इससे पहले फडणवीस ने विलय की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि अगर ऐसी कोई बातचीत चल रही होती, तो अजित पवार उन्हें जरूर बताते। अब बारामती में हुई इस बैठक के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़ा मोड़ लेने वाली है।