भारत अब अमेरिका की अगुवाई वाले PAX Silica गठबंधन में शामिल हो गया है। AI इम्पैक्ट समिट के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिकी दूत भी मौजूद रहे। भारत के जुड़ने से यह रणनीतिक समूह और मजबूत हो गया है। अब कुल 10 से ज्यादा देश इस पहल का हिस्सा बन चुके हैं।
आखिर क्या है PAX Silica?
PAX Silica एक अंतरराष्ट्रीय पहल है, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अहम खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है। “PAX” शब्द शांति और स्थिरता को दर्शाता है। इस पहल के तहत सहयोगी देश मिलकर टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, खनिज और डिजिटल ढांचे को सुरक्षित करने की दिशा में काम करेंगे। इसका उद्देश्य भविष्य की अर्थव्यवस्था को भरोसेमंद और संतुलित बनाना है।
क्यों जरूरी है यह गठजोड़?
21वीं सदी की अर्थव्यवस्था कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और AI पर टिकी है। इन तकनीकों के लिए लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ मेटल जैसे खनिज जरूरी होते हैं। अभी इन खनिजों की वैश्विक सप्लाई पर चीन की मजबूत पकड़ है। ऐसे में PAX Silica का मकसद किसी एक देश पर निर्भरता कम करना और सप्लाई चेन को विविध बनाना है। इससे भविष्य में किसी भी तरह के दबाव या संकट से बचा जा सकेगा।
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रेयर अर्थ मेटल्स क्यों अहम?
रेयर अर्थ मेटल्स 17 खास धातुएं हैं, जो आधुनिक तकनीक की रीढ़ मानी जाती हैं। हथियार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ियां, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर और कई उपभोक्ता वस्तुओं में इनका इस्तेमाल होता है। फिलहाल इनका बड़ा हिस्सा चीन से आता है। इसलिए इन धातुओं की सप्लाई सुरक्षित करना रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी माना जा रहा है।
किन देशों ने किया हस्ताक्षर?
इस गठबंधन में भारत, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। इसके अलावा कनाडा, यूरोपीय यूनियन, नीदरलैंड, OECD और ताइवान जैसे देश बिना हस्ताक्षर के जुड़े हुए हैं। यह समूह मिलकर आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाना चाहता है।
आगे क्या होगा असर?
PAX Silica का लक्ष्य भरोसेमंद डिजिटल नेटवर्क, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत टेक सप्लाई चेन बनाना है। इससे AI सिस्टम ज्यादा सुरक्षित होंगे और संवेदनशील तकनीक की चोरी या गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा। भारत के जुड़ने से इस पहल को एशिया में नई ताकत मिली है। अब यह देखना होगा कि यह गठजोड़ वैश्विक टेक और खनिज बाजार में कितना बड़ा बदलाव ला पाता है।