Indonesia Earthquake: इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत स्थित फ्लोरेस द्वीप पर कुदरत का कहर जारी है। 15 अगस्त 2026 को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद यह इलाका शांत नहीं हुआ है। गुरुवार 20 अगस्त को यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र और जर्मनी के GFZ रिसर्च सेंटर ने क्षेत्र में 5.9 तीव्रता का एक और शक्तिशाली आफ्टरशॉक दर्ज किया। इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर बताई गई है।
आपदाओं से लोग डरे सहमे
आपको बता दें कि यह घटना पहले आए मुख्य भूकंप के केवल 5 दिन बाद हुई है। इससे पहले 17 अगस्त सोमवार को भी समान तीव्रता का आफ्टरशॉक आ चुका था। लगातार आ रही इन आपदाओं से लोग डरे सहमे हैं।
मुख्य भूकंप के बाद महसूस हुए आफ्टरशॉक
15 अगस्त को आए भूकंप की तीव्रता 7.7 थी, जोकि फ्लोरेस बैक-आर्क थ्रस्ट फॉल्ट की गतिविधि से हुआ था। इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी और केंद्र बिंदु एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में समुद्र में था। इसके कारण छोटी सुनामी लहरें भी आईं जिनकी ऊंचाई 1.61 मीटर कर थीं। चेतावनी जैसे की जारी हुई लोग ऊंची जगहों की तरफ भागे और अपनी जान बचाई। मुख्य भूकंप के तुरंत बार कई आफ्टरशॉक महसूस किए गए।
कितना हुआ नुकसान
इन आपदा में कम से कम 53 लोगों की मौत होना बताई जा रही है, लेकिन ये शुरुआती दिनों का आंकड़ा है। बाद में यह आंकड़ा बढ़ता चला गया। बता दें कि मुख्य भूकंप से कम से कम 73 लोगों की मौत हुई और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद 17 अगस्त को आए आफ्टरशॉक में 2 और लोगों की मौत हो गई। बता दें कि इस आपदा में कम से कम 12 हजार घर तबाह हो गए। 900 से ज्यादा घर पूरी तरह ढह गए और कई अन्य क्षतिग्रस्त हो गए। 40 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए और अस्थाई शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
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आखिर फ्लोरेस इतना संवेदनशील क्यों है?
इंडोनेशिया 17 हजार से ज्यादा द्वीपों वाला देश है जहां कई टेक्टोनिक प्लेट मिलती हैं, जिससे कई भूकंप और ज्वालामुखी हमेशा सक्रिय रहते हैं। फ्लोरेस बैक-आर्क थ्रस्ट इसलिए विशेष रूप से बेहद खतरनाक है। 1992 में इसी क्षेत्र में 7.7-7.8 तीव्रता का भूकंप और विशाल सुनामी आई थी, जिसमें करीब 2500 लोग मारे गए थे।
अस्पताल के बाहर टेंट में हो रहा इलाज
फिलहाल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी बचाव कार्य में लगी है जो लोगों तक पर्याप्त खाना और पानी पहुंचा रही है। इस आपदा के कारण बिजली और संचार व्यवस्था बहाल करने में काफी समय लगेगा। लोग घरों में जाने से डर रहे हैं। उनको डर है कि कहीं आपदा फिर से न आ जाए। लोगों का इलाज भी अस्पताल के बाहर टेंट में हो रहा है।