मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से भारत में भी लोग पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। कई लोगों को डर है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं तो देश में ईंधन महंगा हो सकता है। हालांकि सरकारी सूत्रों ने इस मामले में लोगों की चिंता दूर करने की कोशिश की है और कहा है कि फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं दिख रही है।
सरकार ने दिया कीमतों पर संकेत
सरकारी अधिकारियों के अनुसार देश में अभी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि भारत के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन का भंडार मौजूद है। जब तक कच्चे तेल की कीमत लगभग 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जाती, तब तक घरेलू कीमतों पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। फिलहाल अनुमान लगाया जा रहा है कि कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकती है।
देश में ईंधन की सप्लाई सामान्य
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कहीं भी पेट्रोल या डीजल की कमी की स्थिति नहीं है। सभी पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य बनी हुई है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की कमी या परेशानी की स्थिति पैदा न हो। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ईंधन आसानी से मिलता रहे।
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एविएशन फ्यूल को लेकर भी राहत
सरकारी सूत्रों ने एविएशन सेक्टर को लेकर भी स्थिति साफ की है। उनका कहना है कि देश में एविएशन फ्यूल की भी पर्याप्त उपलब्धता है और इसकी सप्लाई में कोई बाधा नहीं है। भारत खुद एविएशन टर्बाइन फ्यूल का उत्पादन करता है और इसका निर्यात भी करता है। इसलिए विमानन क्षेत्र में ईंधन की कमी होने की आशंका को पूरी तरह खारिज किया गया है।
तेल आयात के स्रोत बढ़ा रहा भारत
भारत ने तेल आयात के स्रोतों को भी विविध बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने के लिए अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बावजूद भारत ऊर्जा आपूर्ति के मामले में कई देशों से बेहतर स्थिति में है।
एलपीजी सिलेंडर पर नया नियम लागू
सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी रोकने के लिए भी एक नया नियम लागू किया है। अब घरेलू गैस सिलेंडर की अगली बुकिंग के लिए पहले से ज्यादा इंतजार करना होगा। पहले जहां एक सिलेंडर लेने के बाद 21 दिन में अगली बुकिंग हो सकती थी, अब यह अंतर बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे जरूरत से ज्यादा गैस जमा करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और सभी उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल सकेगा।