Vehicle Insurance Check : अगर आप कार या बाइक चलाते हैं तो यह खबर आपके काम की है। बिना वैध वाहन बीमा के पेट्रोल पंप से ईंधन मिलना मुश्किल हो सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश में ऐसे वाहनों की पहचान के लिए एक पायलट योजना शुरू करने की तैयारी है। इसके तहत पेट्रोल पंपों पर कैमरों की मदद से वाहन का नंबर जांचा जा सकता है और उसे बीमा की जानकारी से जोड़ा जाएगा। हालांकि, यह व्यवस्था अभी पूरे देश में लागू नहीं हुई है।
मध्य प्रदेश में शुरू होगी पायलट योजना
मध्य प्रदेश सरकार एक जिले में इस व्यवस्था का परीक्षण शुरू करने वाली है। जिस जिले में बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या सबसे ज्यादा होगी, उसे पायलट योजना के लिए चुना जाएगा। इसके बाद व्यवस्था सफल रहने पर इसे दूसरे जिलों में भी बढ़ाया जा सकता है। योजना पर सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई है।
पेट्रोल पंप पर कैसे होगी जांच?
प्रस्तावित व्यवस्था में पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को पहचानकर उसकी जानकारी वाहन पोर्टल और बीमा रिकॉर्ड से मिलाएंगे। अगर वाहन का बीमा वैध नहीं पाया गया तो उसे ईंधन देने से रोका जा सकता है। इसका मकसद बिना बीमा वाले वाहनों को आसानी से पहचानना है।
सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है सुझाव
यह विचार पहली बार सामने नहीं आया है। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र और बीमा नियामक से ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा था, जिसमें पेट्रोल पंप पर वाहन के बीमा की स्थिति जांची जा सके। अदालत ने कहा था कि वैध बीमा नहीं होने पर वाहन को ईंधन देने से रोका जा सकता है।
56 फीसदी वाहनों को लेकर चिंता
सुप्रीम कोर्ट के सामने यह बात भी रखी गई थी कि देश में चल रहे करीब 56 फीसदी वाहनों के पास वैध बीमा नहीं है। अदालत ने इस स्थिति को गंभीर बताया। मोटर वाहन कानून के तहत सार्वजनिक जगहों पर चलने वाले वाहनों के लिए कम से कम तीसरे पक्ष का बीमा जरूरी है।
इसे भी पढ़ें : आईने के सामने खुद को देखने की आदत में छिपा है राज, बस 30 सेकंड करें ये काम
अभी क्या करें वाहन मालिक?
फिलहाल देशभर के पेट्रोल पंपों पर यह नियम लागू नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश में भी अभी इसे पायलट स्तर पर आजमाने की तैयारी है। इसलिए वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अपने वाहन का बीमा वैध है या नहीं, यह जरूर जांच लेना चाहिए। बीमा खत्म हो गया है तो समय पर उसका नवीनीकरण करा लेना बेहतर होगा। आगे चलकर ऐसी तकनीकी व्यवस्था दूसरे राज्यों में भी लागू हो सकती है।