पेट्रोल की कीमत बढ़ने के साथ कई लोग अपनी पुरानी कार को सीएनजी पर चलाने का तरीका खोज रहे हैं। अगर आपकी कार कंपनी से सीएनजी मॉडल में नहीं आती, तब भी उसमें अलग से सीएनजी किट लगाई जा सकती है। लेकिन सिर्फ सिलेंडर लगवाकर काम खत्म नहीं होता। कार का इंजन, किट की क्वालिटी, फिटिंग और कागजों से लेकर सुरक्षा तक कई चीजें देखनी पड़ती हैं। गलत किट या गलत फिटिंग बाद में बड़ा खर्च करा सकती है।
हर पेट्रोल कार में नहीं लगती सीएनजी किट
सबसे पहले अपनी कार की जांच करवाना जरूरी है। कार का मॉडल, इंजन और उसकी हालत देखकर तय किया जाता है कि उसमें सीएनजी किट लगाना सही रहेगा या नहीं। सिर्फ कम कीमत देखकर कोई भी किट खरीदना ठीक नहीं है। खराब किट से कार की चाल और इंजन पर असर पड़ सकता है।
किट लगवाने में कितना खर्च आएगा
सीएनजी किट की कीमत कार और किट के हिसाब से बदलती है। अच्छी क्वालिटी वाली सीक्वेंशियल सीएनजी किट के लिए करीब 35 हजार से 55 हजार रुपये तक खर्च आ सकता है। इसके अलावा फिटिंग का खर्च अलग हो सकता है। अगर आपकी कार रोज काफी किलोमीटर चलती है, तो कम ईंधन खर्च के जरिए यह पैसा धीरे-धीरे निकल सकता है।
सीएनजी लगने के बाद क्या बदलेगा
किट लगने के बाद कार पेट्रोल और सीएनजी दोनों पर चल सकती है। हालांकि पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी पर कार की पावर और पिकअप में थोड़ा फर्क महसूस हो सकता है। इसके अलावा सीएनजी सिलेंडर आमतौर पर डिक्की में लगाया जाता है, इसलिए सामान रखने की जगह कम हो जाती है।
सस्ती किट के चक्कर में न पड़ें
सीएनजी किट लगवाते समय सबसे ज्यादा ध्यान उसकी क्वालिटी और फिटिंग पर देना चाहिए। सिलेंडर, गैस पाइप, रेगुलेटर और दूसरे हिस्सों की फिटिंग सही होना बहुत जरूरी है। काम किसी भरोसेमंद और अधिकृत सीएनजी फिटमेंट सेंटर से ही करवाना बेहतर है। बहुत सस्ती किट बाद में इंजन या सुरक्षा से जुड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।
कागजों और सर्विस का भी रखें ध्यान
किट लगवाने के बाद गाड़ी के कागजों में ईंधन की जानकारी अपडेट करवाना जरूरी हो सकता है। बीमा कंपनी को भी इसकी जानकारी देनी चाहिए। साथ ही सीएनजी सिलेंडर की समय-समय पर जांच और कार की सर्विस कराना जरूरी है। अगर कभी गैस की गंध आए या पाइप और फिटिंग में कोई दिक्कत दिखे, तो कार को तुरंत जांच के लिए ले जाएं।