नौकरी बदलते ही ज्यादातर कर्मचारियों का नया पीएफ अकाउंट बन जाता है। UAN एक ही रहता है लेकिन अलग अलग कंपनियों के साथ अलग सदस्य आईडी जुड़ जाती हैं। कई लोग सोचते हैं कि पुराना पीएफ बैलेंस अपने आप नए खाते में चला जाएगा। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता। अगर पुराना बैलेंस ट्रांसफर नहीं हुआ तो आपका पैसा अलग खाते में पड़ा रह सकता है और बाद में उसे संभालना मुश्किल हो सकता है।
खुद करना पड़ सकता है ट्रांसफर
पीएफ अकाउंट अपने आप मर्ज होने का कोई पक्का नियम नहीं है। कुछ मामलों में सिस्टम ऑटोमैटिक ट्रांसफर शुरू कर देता है लेकिन इसके लिए आधार बैंक डिटेल और केवाईसी पूरी तरह अपडेट होना जरूरी है। पुराने और नए दोनों नियोक्ता का ईपीएफओ में डिजिटल रजिस्ट्रेशन भी होना चाहिए। नए नियोक्ता की तरफ से पहला पीएफ योगदान जमा होने के बाद ट्रांसफर रिक्वेस्ट बन सकती है। अगर कोई जानकारी अधूरी है तो आपको खुद ऑनलाइन आवेदन करना पड़ सकता है।
एक खाते में पैसा रखने का फायदा
पुराने पीएफ खाते का बैलेंस नए खाते में ट्रांसफर करने से सारी रिटायरमेंट बचत एक जगह आ जाती है। इससे अलग अलग सदस्य आईडी को ट्रैक करने की परेशानी नहीं रहती। कई बार पुराने खाते निष्क्रिय हो जाते हैं और बाद में पैसा निकालने में देरी होती है। एक ही खाते में पूरा बैलेंस होने से पासबुक देखना आसान होता है। नौकरी बदलने के बाद पीएफ ट्रांसफर करना भविष्य में होने वाली बड़ी परेशानी से बचा सकता है।
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टैक्स बचाने में भी मदद मिलेगी
पीएफ ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा आपकी सर्विस हिस्ट्री से जुड़ा है। पुराने नियोक्ता के साथ काम किए गए साल नए खाते में जुड़ जाते हैं। इससे लगातार पांच साल की सेवा पूरी होने पर पीएफ निकासी टैक्स फ्री हो सकती है। अगर आप पांच साल पूरे होने से पहले पीएफ निकालते हैं तो रकम टैक्स के दायरे में आ सकती है। इसलिए नौकरी बदलने के बाद सिर्फ नया पीएफ खाता खुलवाना काफी नहीं है पुराने खाते का बैलेंस ट्रांसफर करना भी जरूरी है।
ऑनलाइन ऐसे करें PF ट्रांसफर
सबसे पहले EPFO के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर UAN और पासवर्ड से लॉगिन करें। फिर ऑनलाइन सर्विसेज में जाकर वन मेंबर वन ईपीएफ अकाउंट का विकल्प चुनें। यहां आपकी मौजूदा नौकरी का पीएफ अकाउंट दिखेगा। इसके बाद पुरानी कंपनी का पीएफ खाता चुनें और अपनी जानकारी जांच लें। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। ओटीपी डालने के बाद पुराने या मौजूदा नियोक्ता में से किसी एक को वेरिफिकेशन के लिए चुनना होगा। फिर रिक्वेस्ट सबमिट कर दें।
दो UAN बन गए तो क्या करें
कई कर्मचारियों के नाम पर गलती से दो UAN बन जाते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों खाते मर्ज कराना जरूरी है। इसके लिए कर्मचारी EPFO को ईमेल भेजकर पुराने UAN को बंद करने की मांग कर सकते हैं। ईमेल भेजने के लिए [email protected] का इस्तेमाल किया जा सकता है। आवेदन में अपना नाम पुराना UAN नया UAN मोबाइल नंबर और जरूरी जानकारी जरूर लिखें। नौकरी बदलने के बाद पीएफ ट्रांसफर की स्थिति जांचते रहें ताकि रिटायरमेंट का पैसा सुरक्षित रहे।