मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर विवादों के भंवर में है। कांग्रेस के एक विधायक का महिलाओं, दलित समाज और धार्मिक ग्रंथों को लेकर दिया गया बयान न सिर्फ आपत्तिजनक है, बल्कि समाज की बुनियादी संवेदनाओं पर भी सीधा हमला करता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस बयान ने राजनीतिक नैतिकता, महिला सम्मान और जातिगत सोच को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
महिलाओं को लेकर दी गई आपत्तिजनक टिप्पणी
कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने महिलाओं के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और असंवेदनशील टिप्पणी की है। उन्होंने रेप जैसी गंभीर अपराध की घटनाओं को महिलाओं की सुंदरता से जोड़ते हुए कहा कि अगर कोई “खूबसूरत लड़की” दिख जाए तो दिमाग विचलित हो सकता है और ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। उनका यह बयान महिलाओं को अपराध का कारण बताने जैसा है, जिसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
SC-ST-OBC समाज को लेकर घृणित सोच
विवाद यहीं नहीं रुका। विधायक ने आगे दावा किया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के समाज में सुंदर लड़कियां नहीं होतीं, इसलिए उनके साथ ऐसी घटनाएं कम होती हैं। इस बयान को दलित और पिछड़े समाज की महिलाओं के अपमान के तौर पर देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने इसे जातिगत मानसिकता का घिनौना उदाहरण बताया है।
धार्मिक ग्रंथों को लेकर भी किया विवादित दावा
फूल सिंह बरैया ने अपने बयान में धार्मिक ग्रंथों को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने दावा किया कि धर्मग्रंथों में यह लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति तीर्थ यात्रा नहीं कर पाता, तो SC समाज की महिलाओं के साथ संबंध बनाने से तीर्थ का फल मिल जाता है। इस कथन को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और पूरी तरह निराधार बताया जा रहा है।
राजनीतिक घमासान, विरोधियों का तीखा हमला
विधायक के इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। विरोधी दलों ने इसे महिला-विरोधी और दलित-विरोधी मानसिकता करार देते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक माफी और विधायक को पार्टी से निष्कासित करने की मांग की है। यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।
कौन हैं फूल सिंह बरैया
फूल सिंह बरैया मध्य प्रदेश की भांडेर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वे इससे पहले बहुजन समाज पार्टी से भी जुड़े रहे हैं और 1998 में विधायक रह चुके हैं। बरैया पहले भी विवादित बयानों के चलते चर्चा में रहे हैं। ताजा बयान के बाद उनकी राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।