
उत्तर प्रदेश का पीलीभीत जिला जंगल से घिरा हुआ है, इसलिए यहां बाघ, तेंदुआ,भालू और हाथीयों का आतंक है। इन सब के साथ पूरे जिले के बंदरो का आतंक है। बंदरो से आमजनमानस के साथ साथ पुलिस भी परेशान है। बंदरों का झुंड थाने में आतंक मचाते रहते है। कभी पुलिस की वर्दी उठा ले जाते तो कभी पुलिस बालों की कैप तो कभी खाना उठा ले जाते है। इतना ही नहीं फरियादी थाने में आने से डरते है, क्योंकि थाने में पुलिस से ज्यादा लाल मुंह बाले बन्दर मौजूद हैं। मगर जब से थाने का चार्ज लंगुरी बन्दर ने संभाला है, तब से बन्दर कम होने लगे है। पुलिस के साथ साथ थाने के आस पास के दुकानदार व मौहल्ले वाले भी थाना प्रभारी की इस पहल से खुश हैं।
थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठकर होती रखवाली
थाना अध्यक्ष बिलसंडा सिद्धान्त शर्मा का कहना है कि लंगुरी बंदर बैठा रहता है। वे अपने हाथ से बिस्कुट खिलाते रहते हैं। लंगुरी बन्दर थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठकर थाने की निगरानी करता है। थाना अध्यक्ष का कहना है कि हमारे थाने के कमरे खुले रहते, लाल मुंह बाले बन्दर कभी वर्दी उठा ले जाते कभी कैप लेकर भाग जाते है। कभी जरूरी कागज फाड़ देते है। इतना ही नही आये दिन इंटरनेट के तार काट देते है, बहुत दिक्कत देते है बन्दर, फरियादी परेशान होते हैं।
बन्दर थाने में आतंक मचाने लगते है
मगर जब से लंगुरी बन्दर थाने में लाये गए हैं, उससे लाल मुह बाले बंदर कम हो गए है। जब तक लंगुरी बन्दर यहां रहता है, बन्दर आस पास नहीं फटकते हैं। जब लंगुरी बन्दर नहीं होता है तो फिर लाल मुहं बाले बन्दर थाने में आतंक मचाने लगते है। पहले यहां लंगुरी बन्दर के पोस्टर भी लगाए गये थे,लेकिन बन्दर पोस्टर को छू छू कर देखते जिससे उनका डर निकल गया। लंगुरी बन्दर जब यहां रहता है तो बंदर नहीं आते हैं।