Pilot Drug Test : हवाई जहाज उड़ाने वाले पायलट की जिम्मेदारी बेहद बड़ी होती है, क्योंकि विमान में बैठे सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा उसके फैसलों पर निर्भर करती है। हाल ही में एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान से जुड़े मामले में पायलट के मारिजुआना यानी गांजा सेवन की पुष्टि होने के बाद एविएशन सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि शराब पकड़ने वाला ब्रीथ एनालाइजर गांजे का पता नहीं लगा सकता।
उड़ान से पहले होता है ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट
पायलट और चालक दल के सदस्यों की उड़ान से पहले ब्रीथ एनालाइजर जांच की जाती है। इसमें मशीन के जरिए सांस में अल्कोहल की मौजूदगी जांची जाती है। नियमों के अनुसार इसकी रीडिंग शून्य होनी चाहिए। जरूरत के मुताबिक उड़ान के बाद भी यह जांच की जा सकती है। लेकिन यह जांच मुख्य रूप से शराब का पता लगाने के लिए होती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति ने गांजा या किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन किया है, तो सामान्य ब्रीथ एनालाइजर जांच में उसका पता चलना जरूरी नहीं है।
गांजा पकड़ने के लिए होता है डोप टेस्ट
पायलटों के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच के लिए अलग डोप या ड्रग टेस्ट किया जाता है। इसमें आमतौर पर पेशाब या रक्त के नमूने की जांच की जाती है। इस जांच में मारिजुआना, कोकीन, अफीम और एम्फेटामिन जैसे पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है। हालांकि यह जांच हर उड़ान से पहले नियमित रूप से नहीं होती।
एयर इंडिया की उड़ान में क्या हुआ
रिपोर्ट के मुताबिक, 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान AI-2379 अचानक करीब 300 फीट नीचे चली गई थी। विमान में 145 लोग सवार थे। घटना के बाद पायलट का साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़ा परीक्षण कराया गया। शुरुआती जांच में नतीजा ‘नॉन-नेगेटिव’ आया, जिसके बाद नमूना पुष्टि के लिए भेजा गया। बाद की जांच में मारिजुआना की पुष्टि होने की खबर सामने आई।
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क्यों अहम है यह मामला
इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि पायलटों की जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी है और अलग-अलग नशीले पदार्थों की पहचान के लिए किस तरह की जांच जरूरी है। हालांकि मामले की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल इस घटना ने विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और पायलटों की फिटनेस को लेकर गंभीर चर्चा जरूर शुरू कर दी है।