Pithori Amavasya 2026: सनातन परंपरा में अमावस्या की तिथि को धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान और पूजा-पाठ करने की परंपरा है। भाद्रपद महीने में पड़ने वाली अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इस बार यह तिथि 10 सितंबर 2026 को पड़ रही है। पिठोरी अमावस्या का संबंध सिर्फ पितरों की पूजा से ही नहीं है, बल्कि इसे संतान की खुशहाली और उनकी लंबी उम्र की कामना से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन माताएं विशेष पूजा और व्रत करके अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की प्रार्थना करती हैं। वहीं पितरों के लिए किए गए तर्पण और दान को भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है। अगर परिवार में पितृ दोष से जुड़ी कोई समस्या मानी जाती है तो अमावस्या के दिन कुछ धार्मिक उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं इस दिन का पूजा समय, पितरों के लिए किए जाने वाले उपाय और पिठोरी अमावस्या से जुड़ी मान्यता।
पिठोरी अमावस्या 2026 का शुभ समय
अमावस्या तिथि आरंभ: 10 सितंबर 2026, सुबह 10:33 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 11 सितंबर 2026, सुबह 8:56 बजे
प्रदोष काल: शाम 6:39 बजे से रात 8:57 बजे तक
संध्या के समय पूजा-पाठ के लिए प्रदोष काल को विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।
पितृ दोष से राहत के लिए क्या करें?
पिठोरी अमावस्या पर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करने की परंपरा है। इसके लिए तांबे के पात्र में पानी लेकर उसमें कुश और काले तिल डालें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। इसके अलावा शाम के समय घर के मुख्य दरवाजे और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की परंपरा है। इसके बाद पितरों से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगकर उनका आशीर्वाद लेने की प्रार्थना करें। इस दिन गाय को गुड़ और रोटी खिलाना भी शुभ माना जाता है। कौवों और दूसरे पक्षियों के लिए घर की छत पर अन्न या चावल रखने की परंपरा है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद लोगों को भोजन, अनाज अथवा कपड़े का दान भी किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें: 10 September 2026 Panchang: आज कब से लगेगी अमावस्या? जानें 10 सितंबर का पंचांग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त
पिठोरी अमावस्या की धार्मिक कथा
पिठोरी अमावस्या को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इस दिन प्रदोष बेला में महिलाएं अपनी संतान की रक्षा और उनकी लंबी उम्र की कामना से विशेष पूजा करती हैं। इस पूजा में मां दुर्गा के साथ 64 योगिनी देवियों का स्मरण और पूजन किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत संतान के जीवन में सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा है। पौराणिक कथा में ऐसी मान्यताएं भी मिलती हैं कि इस व्रत के प्रभाव से मृत संतान को दोबारा जीवन मिलने जैसा चमत्कार हुआ था। इसी वजह से संतान की कामना रखने वाली महिलाओं के लिए भी पिठोरी अमावस्या को महत्वपूर्ण माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।