Pitru Dosh: ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में बनने वाले कई योगों का व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव बताया गया है। इन्हीं में पितृदोष का भी उल्लेख मिलता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में पितृदोष होने पर व्यक्ति को परिवार, संतान और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पितृदोष को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं कि आखिर यह दोष कैसे बनता है और इसके कारण किस तरह की समस्याएं आती हैं। इस विषय पर प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जानकारी ली गई है।
कुंडली में कैसे बनता है पितृदोष?
ज्योतिष के अनुसार, पितृदोष के निर्माण में सूर्य और मंगल की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य को पिता और पितृ पक्ष का कारक ग्रह माना गया है, जबकि मंगल का संबंध रक्त और वंश से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब सूर्य पर शनि, राहु या केतु जैसे ग्रहों का अशुभ प्रभाव पड़ता है तो कुंडली में सूर्य से संबंधित पितृदोष बन सकता है। ग्रहों की युति या दृष्टि संबंध के आधार पर इसकी स्थिति देखी जाती है। इसी तरह यदि मंगल राहु या केतु के साथ किसी अशुभ भाव में स्थित हो, तो इसे मंगल से बनने वाला पितृदोष माना जाता है। इसके अलावा गुरु का राहु के साथ संबंध बनना भी ज्योतिष में पितृदोष से जोड़कर देखा जाता है।
पितृदोष होने पर किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है?
ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, कुंडली में पितृदोष होने पर पारिवारिक जीवन में तनाव बढ़ सकता है। घर के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद होने की स्थिति बन सकती है और वातावरण में अशांति बनी रह सकती है। कई बार व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि मेहनत करने के बावजूद काम आखिरी समय में अटक जा रहा है। शुरू किए गए कार्यों में बार-बार बाधाएं आने की स्थिति भी पितृदोष से जोड़कर देखी जाती है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन या अधिक गुस्सा होने से आपसी तनाव बढ़ सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में पितृदोष को संतान से जुड़ी परेशानियों से भी संबंधित माना गया है। ऐसी स्थिति में संतान प्राप्ति में विलंब या बच्चों के विवाह में रुकावट आने की बात कही जाती है। हालांकि, किसी व्यक्ति की कुंडली में इन स्थितियों का कारण केवल पितृदोष ही हो, यह जरूरी नहीं है। ज्योतिष में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी कुंडली और ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है।
यह भी पढ़ें: Diwali 2026: 8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली, जानें धनतेरस से भाई दूज तक की तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त
पितृदोष से राहत के लिए क्या करें?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, पितृदोष से जुड़े उपायों के लिए पितृ पक्ष को विशेष माना जाता है। इस दौरान पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से पितरों का स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक कर्म करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके अलावा कुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह से विशेष उपाय भी किए जा सकते हैं। पितृदोष की वास्तविक स्थिति और उससे जुड़े उपाय जानने के लिए जन्म कुंडली का विस्तृत अध्ययन जरूरी माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।