
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद पाने के लिए बहुत खास माना जाता है। यह समय श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मों के लिए होता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दौरान श्रद्धा और नियमों के साथ पूर्वजों को याद करता है, उसे पितरों की विशेष कृपा मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
पितृ पक्ष 2025 कब है?
पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 6 सितंबर (शनिवार) को होगी और समापन 20 सितंबर (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दौरान हर दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु उसी तिथि को हुई हो। यदि किसी को अपने पितरों की तिथि याद नहीं है, तो वह अमावस्या के दिन सभी पितरों का सामूहिक श्राद्ध कर सकता है।
पितृ पक्ष में करने योग्य उपाय
तर्पण और पिंडदान करें – यह सबसे जरूरी कर्म है। इसे नदी, तालाब या किसी पवित्र जल में किया जाता है। इससे पितरों को शांति मिलती है।
ब्राह्मण या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएं – विशेष रूप से खीर, पूरी, दाल और सब्जी का भोग लगाकर पितरों के नाम से दान करना शुभ माना जाता है।
कौवों, गायों और कुत्तों को भोजन दें – मान्यता है कि पितर इन रूपों में आकर भोजन स्वीकार करते हैं।
तुलसी के पास दीपक जलाएं और पितरों के नाम से प्रार्थना करें।
पितृ पक्ष में क्या न करें?
इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, सगाई, नया व्यापार शुरू करना आदि नहीं किए जाते।
मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
घर में ज्यादा शोर-शराबा या नकारात्मक व्यवहार से भी बचें।
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पितृ पक्ष 2025 एक अवसर है अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का। जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से इन दिनों में पितरों का श्राद्ध करता है, उसे उनके आशीर्वाद से जीवन में उन्नति, सुख और शांति मिलती है। अतः इस पावन समय का सदुपयोग करें और घर-परिवार की खुशहाली के लिए ये सरल उपाय अपनाएं।