
आज 13 सितंबर 2025 को पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि का श्राद्ध किया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष के इन 16 दिनों में प्रत्येक तिथि का विशेष महत्व होता है, और सप्तमी तिथि उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध करने का दिन है जिनकी मृत्यु सप्तमी को हुई थी। इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक किए गए कर्मकांड से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद स्वरूप वंशजों को सुख, समृद्धि और शांतिपूर्ण जीवन प्रदान करते हैं।
पितृ पक्ष सप्तमी का महत्व
सप्तमी तिथि का श्राद्ध मुख्यतः उन पितरों के लिए किया जाता है जो इस तिथि पर देह त्याग कर चुके हैं। माना जाता है कि यदि श्राद्ध विधिपूर्वक और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पितृगण तृप्त होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और उनके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
कुतुप मुहूर्त और शुभ समय
श्राद्ध कर्म करने के लिए सबसे उपयुक्त समय ‘कुतुप मुहूर्त’ माना गया है। यह मुहूर्त दोपहर से पहले का होता है और मान्यता है कि इस समय में किए गए तर्पण और पिंडदान सीधे पितृलोक तक पहुंचते हैं।
कुतुप मुहूर्त आरंभ: 11:51 AM
अवधि: लगभग 48 मिनट
रौहिण मुहूर्त: इसके तुरंत बाद लगभग 40 मिनट तक
इस दौरान तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन व दक्षिणा देना अत्यंत फलदायी होता है।
पितरों को प्रसन्न करने की विधि
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठें।
तिल, जल, चावल और दूध का उपयोग करके तर्पण करें।
पिंडदान के लिए पकवान, खीर, पूड़ी और मौसमी फल तैयार करें।
किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा दें।
गरीबों को अन्न, वस्त्र और दान दें।
ध्यान देने योग्य बातें
श्राद्ध के दिन तामसिक भोजन से परहेज करें।
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत न करें।
पितरों का स्मरण करते समय मन में शुद्ध भाव रखें।