Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को संयम और सादगी के साथ बिताने की सलाह दी जाती है। यही कारण है कि पितृ पक्ष शुरू होते ही लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं, खासकर यह कि क्या इन दिनों नए कपड़े, गहने या दूसरी वस्तुएं खरीदना ठीक होता है। अगर आपके मन में भी यही सवाल है तो आइए जानते हैं पितृ पक्ष के दौरान खरीदारी और दैनिक जीवन से जुड़े प्रमुख धार्मिक नियम क्या माने जाते हैं।
पितृ पक्ष में नई चीज खरीदना कितना सही?
धार्मिक परंपराओं में पितृ पक्ष के दौरान हर तरह की खरीदारी पर रोक नहीं बताई गई है। हालांकि इस अवधि में जरूरत से ज्यादा खर्च करने या बड़ी खरीदारी करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, नए आभूषण, महंगे कपड़े, वाहन, घर, जमीन या लोहे से संबंधित सामान खरीदने के लिए यह समय उपयुक्त नहीं माना जाता। इसकी वजह यह मानी जाती है कि पितृ पक्ष का मुख्य उद्देश्य भौतिक सुख-सुविधाओं के बजाय पूर्वजों का स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। हालांकि रोजमर्रा की जिंदगी में जरूरी सामान की आवश्यकता पड़ जाए तो उसे खरीदने को पूरी तरह वर्जित नहीं माना जाता। यानी जरूरत और अनावश्यक खरीदारी के बीच अंतर रखना जरूरी है।
इस दौरान शुभ काम क्यों नहीं किए जाते?
पितृ पक्ष में शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यक्रम आमतौर पर नहीं किए जाते। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह समय पितरों को समर्पित होता है, इसलिए इन दिनों उत्सव और बड़े समारोहों से दूरी रखी जाती है। श्राद्ध पक्ष में घर का वातावरण शांत रखने और पूजा-पाठ व पूर्वजों के स्मरण पर ध्यान देने की परंपरा है। इसी वजह से मांगलिक कार्यों के लिए पितृ पक्ष के समाप्त होने का इंतजार किया जाता है।
कपड़े पहनते समय भी रखें सादगी
पितृ पक्ष के दौरान पहनावे में भी सादगी रखने की परंपरा है। श्राद्ध या तर्पण जैसे धार्मिक कार्य करते समय हल्के रंग के साफ-सुथरे कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। सफेद और हल्के पीले रंग के वस्त्रों को विशेष रूप से पसंद किया जाता है। इस दौरान भड़कीले या बहुत ज्यादा चमकदार पहनावे से बचने की सलाह दी जाती है। इसका उद्देश्य इस अवधि की गंभीरता और सादगी को बनाए रखना माना जाता है।
पितृ पक्ष में किन कामों से बचें?
इस अवधि में बाल और दाढ़ी कटवाने से परहेज करने की परंपरा है।
खान-पान में सात्विकता रखने और मांसाहारी भोजन से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
शराब और दूसरे नशीले पदार्थों से बचना चाहिए।
घर में बेवजह का विवाद या अशांति न हो, इसका ध्यान रखें।
जरूरतमंद, कमजोर या असहाय व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार न करें।
पशु-पक्षियों को नुकसान पहुंचाने से भी बचना चाहिए।
पितरों के प्रति श्रद्धा रखते हुए दान, तर्पण और सेवा जैसे कार्यों पर ध्यान देना शुभ माना जाता है।
पितृ पक्ष में रखें श्रद्धा और संयम
पितृ पक्ष को केवल कुछ नियमों का पालन करने की अवधि के तौर पर नहीं देखा जाता। धार्मिक परंपरा में इसका संबंध अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने और परिवार में संस्कारों को आगे बढ़ाने से जोड़ा जाता है। इसलिए इन दिनों दिखावे से दूर रहकर सादगी, सेवा और श्रद्धा के साथ समय बिताने की सलाह दी जाती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।