Piyush Goyals statement: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और रूस से तेल खरीद को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपनी बात रखी है। एक समाचार एजेंसी से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ट्रेड डील में यह तय नहीं किया गया है कि भारत किस देश से क्या खरीदेगा। मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले करता है और किसी भी समझौते से घरेलू किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
ट्रेड डील की शर्तें
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में यह कहीं नहीं लिखा है कि किसी विशेष वस्तु की खरीद किसी तय देश से ही की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझौता बाजार पहुंच और व्यापार सुगमता से जुड़ा है, न कि खरीद की बाध्यताओं से। मंत्री के मुताबिक, भारत अपने हितों के अनुसार स्वतंत्र रूप से फैसले लेने में सक्षम है।
रूस से तेल का सवाल
रूस से तेल खरीद पर पूछे गए सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी या एलपीजी खरीदना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना चाहता है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता न रहे। इस विषय को उन्होंने विदेश नीति से जुड़ा मामला बताया।
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सेब आयात का गणित
मंत्री ने बताया कि देश में सेब की कुल मांग लगभग 25 से 26 लाख टन है, जबकि घरेलू उत्पादन 20 से 21 लाख टन के बीच रहता है। इसी अंतर को पूरा करने के लिए भारत हर साल करीब 5.5 लाख टन सेब आयात करता है। अमेरिका से सेब आयात के लिए सीमित कोटा तय किया गया है, जो मौजूदा आयात स्तर से भी कम है।
किसानों की सुरक्षा
पीयूष गोयल ने कहा कि सेब आयात पर न्यूनतम आयात मूल्य और शुल्क इसलिए तय किया गया है ताकि सस्ते दाम पर डंपिंग न हो। वर्तमान व्यवस्था के तहत आयातित सेब की कीमत एक निश्चित स्तर से नीचे नहीं जा सकती। उन्होंने दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता किसानों के हितों की रक्षा करना है और किसी भी व्यापार समझौते से उनके उचित मूल्य पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।