
What is Placenta : गर्भावस्था एक अत्यंत जटिल लेकिन खूबसूरत प्रक्रिया है, जिसमें महिला का शरीर एक नए जीवन को जन्म देने के लिए कई बदलावों से गुजरता है. इसी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है प्लेसेंटा (Placenta) — एक ऐसा अंग जो मां और शिशु के बीच जीवन रेखा की तरह काम करता है। प्लेसेंटा के बिना गर्भ में पल रहे भ्रूण का विकास संभव नहीं है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह प्लेसेंटा बनाता कौन है? इसका निर्माण कैसे होता है? और आखिर इसका काम क्या है? आइए जानते हैं इस महत्वपूर्ण अंग के बारे में पूरी जानकारी.
प्लेसेंटा क्या है?
प्लेसेंटा एक फ्लैट, डिस्क के आकार का अंग होता है जो गर्भाशय (uterus) की दीवार से जुड़ा होता है. यह गर्भावस्था के दौरान मां और भ्रूण के बीच एक संपर्क माध्यम के रूप में कार्य करता है. इसकी मदद से भ्रूण को सभी ज़रूरी पोषक तत्व, ऑक्सीजन और हार्मोन मिलते हैं, जो उसके संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक होते हैं.
प्लेसेंटा कौन बनाता है और कब बनता है?
प्लेसेंटा को शरीर का कोई अलग अंग नहीं बनाता, बल्कि भ्रूण और मां के शरीर की कोशिकाएं मिलकर इसका निर्माण करती हैं. जब अंडाणु (egg) निषेचित होकर यूटेरस में जाकर चिपकता है (जिसे implantation कहते हैं), तब उसी समय से प्लेसेंटा बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. यह प्रक्रिया गर्भावस्था के पहले ट्राइमेस्टर (यानी पहले तीन महीनों) में होती है और धीरे-धीरे यह पूरी तरह विकसित हो जाता है.
प्लेसेंटा का कार्य क्या है?
1. पोषण और ऑक्सीजन की आपूर्ति
प्लेसेंटा मां के रक्त से पोषक तत्व और ऑक्सीजन को लेकर भ्रूण तक पहुंचाता है. इससे शिशु का विकास सही ढंग से हो पाता है.
2. अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना
जैसे ही भ्रूण शरीर में प्रक्रियाएं करता है, वैसे-वैसे कुछ अपशिष्ट (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, यूरिया आदि) बनते हैं. प्लेसेंटा इन अपशिष्टों को मां के रक्त में पहुंचाकर उन्हें बाहर निकालने में मदद करता है.
3. हार्मोन का निर्माण
प्लेसेंटा कई ज़रूरी हार्मोन जैसे प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन और hCG (human chorionic gonadotropin) बनाता है, जो गर्भावस्था को बनाए रखने और भ्रूण के विकास में मदद करते हैं.
4. संक्रमण से सुरक्षा
प्लेसेंटा शिशु को मां के शरीर में मौजूद संक्रमणों से बचाने की कोशिश करता है. हालांकि, कुछ हानिकारक वायरस या बैक्टीरिया फिर भी पार कर सकते हैं.
5. मां और शिशु के खून को अलग रखना
प्लेसेंटा इस बात का ध्यान रखता है कि मां और भ्रूण के खून आपस में न मिलें, क्योंकि दोनों के ब्लड ग्रुप अलग हो सकते हैं और इसके मिलने से जटिलताएं पैदा हो सकती हैं.
प्लेसेंटा से जुड़ी कुछ समस्याएं
कभी-कभी प्लेसेंटा से जुड़ी कुछ जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे:
प्लेसेंटा प्रीविया – जब प्लेसेंटा गर्भाशय के मुंह को ढक लेता है
प्लेसेंटा एब्रप्शन – जब प्लेसेंटा समय से पहले गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाता है
इनसफिशिएंट प्लेसेंटा – जब प्लेसेंटा पर्याप्त पोषक तत्व नहीं पहुंचा पाता
ऐसी स्थितियों में डॉक्टर की निगरानी बेहद जरूरी होती है.
प्लेसेंटा गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु के बीच जीवनदायिनी पुल की तरह होता है. यह न केवल भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन देता है, बल्कि उसे बाहरी खतरों से भी बचाता है. इसका निर्माण भ्रूण और मां दोनों की कोशिकाओं द्वारा मिलकर होता है और इसकी भूमिका गर्भावस्था के पूरे समय तक बेहद अहम होती है. इसलिए प्लेसेंटा की स्थिति और स्वास्थ्य की डॉक्टर द्वारा नियमित जांच कराते रहना आवश्यक है, ताकि गर्भावस्था स्वस्थ और सुरक्षित बनी रहे.