देश के करोड़ों किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना बड़ी राहत है, जिसके तहत सालाना 6 हजार रुपये सीधे खाते में आते हैं। अब तक योजना की 21 किस्तें जारी हो चुकी हैं और सभी को 22वीं किस्त का इंतजार है। लेकिन इसी बीच एक जरूरी शर्त सामने आई है। अगर किसान की फार्मर आईडी नहीं बनी है, तो अगली किस्त का पैसा अटक सकता है। सरकार अब लाभार्थियों की पहचान को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है, ताकि फर्जी रजिस्ट्रेशन रोका जा सके और सही किसान तक पैसा पहुंचे।
क्या है फार्मर आईडी, क्यों जरूरी
फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जिसमें जमीन, फसल, खाद, पशुपालन और आय से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज होती है। यह आईडी AgriStack सिस्टम से जुड़ी होती है और सरकार की कई कृषि योजनाओं का आधार बन रही है। फार्मर आईडी बनने से यह तय होता है कि योजना का लाभ सही और पात्र किसान को ही मिले। सरकार का साफ संदेश है कि बिना फार्मर आईडी के भविष्य में पीएम किसान जैसी योजनाओं का लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है। इसलिए इसे सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जरूरी दस्तावेज माना जा रहा है।
फार्मर आईडी बनाने की पहली प्रक्रिया
फार्मर आईडी बनाने के लिए सबसे पहले अपने राज्य के AgriStack पोर्टल पर जाकर नई यूजर आईडी बनानी होती है। यहां आधार नंबर डालकर केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है, जिसे वेरिफाई करना जरूरी होता है। इसके बाद मोबाइल नंबर का दोबारा सत्यापन होता है और यूजर आईडी एक्टिव हो जाती है। फिर नया पासवर्ड बनाकर लॉगिन किया जाता है। यह पूरा प्रोसेस ऑनलाइन है और सही जानकारी भरने पर ज्यादा समय नहीं लगता।
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जमीन सत्यापन और अंतिम मंजूरी
लॉगिन के बाद किसान को अपनी प्रोफाइल में किसान का प्रकार चुनना होता है और जमीन से जुड़ी जानकारी भरनी होती है। खसरा नंबर समेत सभी खेतों का विवरण देना जरूरी है। इसके बाद सोशल रजिस्ट्री सेक्शन में फैमिली आईडी या राशन कार्ड की जानकारी मांगी जाती है। अंत में रेवेन्यू डिपार्टमेंट को अप्रूवल के लिए चुनकर डिजिटल सहमति देनी होती है। अगर दी गई जानकारी सही होती है, तो जांच के बाद फार्मर आईडी बन जाती है। यही आईडी आगे चलकर पीएम किसान की किस्त और दूसरी योजनाओं का रास्ता खोलेगी।