हरियाणा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरकारी जांच में पाया गया है कि हजारों लोगों ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ उठाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 44 हजार दंपती ऐसे मिले जिनमें पति-पत्नी दोनों ने ही इस योजना की किस्तें लीं, जबकि नियम अनुसार केवल एक व्यक्ति पात्र होता है। रिपोर्ट सामने आते ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अफसरों पर सख्त रुख अपनाया है और फर्जी लाभ लेने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ गलती नहीं, बल्कि गंभीर गड़बड़ी है जिसकी हर परत खोली जाएगी।
जमीन बेचने के बाद भी ले रहे थे किस्त
जांच में पाया गया कि 9700 से अधिक लोग ऐसे हैं जिन्होंने जमीन बेचने के बाद भी योजना की किस्तें लेना जारी रखा। न सिर्फ इतना, बल्कि कई खरीदार भी उसी जमीन पर किस्तें ले रहे थे, यानी एक ही जमीन पर दो-दो लोग लाभ ले रहे थे। यह भी उजागर हुआ कि 17 हजार ऐसे पूर्व मालिक हैं, जिनके नाम पर अब जमीन नहीं है, फिर भी वे सालों से किस्तें ले रहे थे। इतना ही नहीं, 1400 से ज्यादा कम उम्र के और अपात्र लोग भी योजना के लाभार्थी पाए गए। जांच अधिकारियों ने इसे “सिस्टम में बड़ी सेंध” बताया है और कहा है कि यह कई स्तरों पर नियमों के उल्लंघन का संकेत है।
6917 करोड़ का वितरण, लेकिन कौन पात्र ?
हरियाणा में PM-KISAN के तहत अब तक 6917 करोड़ रुपए किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। लेकिन रिपोर्ट के बाद बड़ा सवाल यह है कि इनमें से वास्तविक पात्र किसानों को कितना मिला और फर्जी लोगों के खाते में कितना गया? जांच में पाया गया कि कई मामलों में एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्य दो-दो पते दिखाकर पैसे ले रहे थे। कुछ मामलों में तो एक ही व्यक्ति दो गांवों में किसान दर्ज मिल गया। सरकार का कहना है कि यह अनदेखी नहीं बल्कि व्यवस्थित तरीके से किया गया फर्जीवाड़ा है, जिसकी अब गहराई से जांच की जा रही है।
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सैनी सरकार की सख्त चेतावनी
रिपोर्ट सामने आने के बाद सैनी सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी फर्जी लाभार्थी को छोड़ा नहीं जाएगा। सभी संदिग्ध लाभार्थियों की लिस्ट दोबारा जांची जा रही है। जिन अफसरों की लापरवाही से यह गड़बड़ी हुई, उन पर भी कार्रवाई तय है। कई मामलों में रिकवरी के आदेश जारी करने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि यह योजना असली किसानों के लिए है, इसलिए फर्जी तरीकों से लाभ लेने वालों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह मामला अब पूरे देश में बहस का विषय बन गया है कि आखिर इतनी गड़बड़ी लंबे समय तक सिस्टम की नजर से कैसे बची रही?