प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 130वें एपिसोड में लोकतंत्र, युवाओं, स्टार्टअप संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम विषयों पर देश को संबोधित किया। उन्होंने मतदाता दिवस पर नए वोटरों को बधाई देने की अपील की, स्टार्टअप इंडिया की तेज़ रफ्तार पर संतोष जताया और ‘क्वालिटी’ को राष्ट्रीय मंत्र बनाने का आह्वान किया। साथ ही नदी पुनर्जीवन, जल संरक्षण और सामुदायिक प्रयासों की प्रेरक मिसालें भी साझा कीं।
मतदाता दिवस पर संदेश: लोकतंत्र की आत्मा हैं वोटर
प्रधानमंत्री ने कहा कि मतदाता लोकतंत्र की आत्मा होता है और जब कोई युवा पहली बार वोटर बनता है तो पूरे समाज को उसे बधाई देनी चाहिए। गांव, मोहल्ले या शहर में मिलकर मिठाई बांटने जैसी पहल से मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और यह भावना मजबूत होगी कि वोट डालना नागरिक कर्तव्य है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत करने का प्रभावी तरीका बताया।
स्टार्टअप इंडिया की उड़ान: हर सेक्टर में भारतीय नवाचार
पीएम ने बताया कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर 2016 की तस्वीरें साझा करने के ट्रेंड का उल्लेख करते हुए कहा कि बीते दस वर्षों में देश में ऐसे नवाचार हुए हैं, जिनकी पहले कल्पना भी कठिन थी। AI, स्पेस, सेमीकंडक्टर, न्यूक्लियर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवा आगे बढ़ रहे हैं।
‘क्वालिटी’ को बनाएं पहचान: इंडियन प्रोडक्ट का नया अर्थ
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम सभी का मंत्र होना चाहिए—क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी। इंडियन प्रोडक्ट का मतलब विश्वस्तरीय गुणवत्ता बनना चाहिए और इसमें किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जो लोग नया स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, वे इसी सोच के साथ आगे बढ़ें।
नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण: जनभागीदारी से बदलाव
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की तमसा नदी का जिक्र करते हुए पीएम ने बताया कि लोगों की भागीदारी से इसे नया जीवन मिला है। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में सूखे से जूझ रहे इलाके में जलाशयों को पुनर्जीवित किया गया और हजारों पेड़ लगाए गए, जिससे पानी के साथ हरियाली भी लौटी। इन उदाहरणों को उन्होंने सामूहिक प्रयासों की ताकत बताया।
पर्यावरण और संस्कृति: छोटे कदम, बड़ा असर
प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण में जुटे नागरिकों की सराहना की और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत करोड़ों पौधे लगाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान के वैश्विक विस्तार, सामुदायिक रसोई जैसी परंपराओं और युवाओं द्वारा सफाई अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी और सामूहिकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है।