प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने आवास सात लोक कल्याण मार्ग पर देश के अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवाचार उद्यमों के साथ गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक अगले महीने भारत में होने वाले भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव सम्मेलन से पहले हुई, जिसे लेकर तकनीकी जगत में काफी उत्साह है। इस सम्मेलन के लिए देश के बारह नवाचार उद्यमों का चयन किया गया है, जिनसे प्रधानमंत्री ने विस्तार से चर्चा की।
कई क्षेत्रों में काम कर रहे चयनित उद्यम
बैठक में शामिल नवाचार उद्यम अलग अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें भारतीय भाषाओं पर आधारित मॉडल, बहुभाषी ज्ञान प्रणाली, आवाज से शब्द और शब्द से आवाज तकनीक, शब्द से दृश्य निर्माण, व्यापार और विपणन के लिए सामग्री निर्माण, उद्योगों में आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने की तकनीक, सामग्री अनुसंधान, उन्नत विश्लेषण, स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय अनुसंधान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन प्रयासों से देश की तकनीकी क्षमता तेजी से आगे बढ़ रही है।
भारत बनता जा रहा वैश्विक केंद्र
बैठक के दौरान नवाचार उद्यमों के प्रतिनिधियों ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नवाचार और प्रयोग का केंद्र अब तेजी से भारत की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना था कि भारत में ऐसा मजबूत वातावरण बन रहा है, जहां तकनीक का विकास और उसका बड़े स्तर पर उपयोग दोनों संभव हो पा रहे हैं। इससे भारत वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर मजबूत स्थिति में आ गया है।
समाज परिवर्तन में तकनीक की भूमिका पर जोर
प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाज में बड़े बदलाव लाने की ताकत रखती है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य तकनीक को सिर्फ सुविधा तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसका उपयोग जनजीवन को बेहतर बनाने के लिए करना है। आने वाला भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव सम्मेलन इसी सोच को दुनिया के सामने रखेगा।
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भविष्य के निर्माता हैं युवा उद्यमी
प्रधानमंत्री ने कहा कि नवाचार उद्यम और तकनीक से जुड़े युवा देश के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत को ऐसा मॉडल विकसित करना चाहिए, जो देश में बना हो और पूरी दुनिया के लिए उपयोगी हो। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत दुनिया का भरोसा है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।
नैतिकता और स्थानीयता पर खास ध्यान
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि भारतीय तकनीकी मॉडल नैतिक, निष्पक्ष, पारदर्शी और गोपनीयता आधारित होने चाहिए। साथ ही स्थानीय भाषाओं और स्वदेशी सामग्री को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि तकनीक हर वर्ग तक पहुंचे। बैठक में देश के कई प्रमुख नवाचार उद्यमों के प्रमुखों के साथ केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और राज्य मंत्री भी मौजूद रहे।