मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 40 मिनट तक फोन पर बात हुई। इस बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने पर चर्चा हुई। ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा कि अमेरिका भारत से प्यार करता है और दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी ने भी ट्रंप को आश्वस्त किया कि भारत मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता के लिए काम करेगा। इस बातचीत के बाद ईरान ने भी भारतीय तेल और एलपीजी टैंकरों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है।
मिडिल ईस्ट में तनाव का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से आधा मिडिल ईस्ट से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ेंगी। RBI के अनुमान से कच्चे तेल में 10% तेजी आने पर महंगाई में 30 आधार अंक की बढ़ोतरी हो सकती है। EY की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध लंबा खिंचा तो भारत की GDP ग्रोथ में 1% तक कटौती और खुदरा महंगाई 1.5% तक बढ़ सकती है। भारत के कृषि-खाद्य निर्यात का 21.8% हिस्सा पश्चिम एशिया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट का 44 अरब डॉलर भी जोखिम में है। टेक्सटाइल, केमिकल, फर्टिलाइजर, सीमेंट, टायर जैसे सेक्टरों पर सबसे ज्यादा गाज गिरेगी।
ईरान-अमेरिका तनाव का भविष्य
सूत्रों के मुताबिक ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर का प्लान है। पाकिस्तान मध्यस्थ है। समझौते में तुरंत सीजफायर और होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है। 45 दिन के सीजफायर पर भी बातचीत चल रही है। अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान के भूमिगत ठिकानों पर 'बंकर बस्टर' बमों से हमला किया। ट्रंप ने दावा किया कि 58 ईरानी जहाज और 31 बारूदी नावें नष्ट की गईं। अमेरिका ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान भी किया, लेकिन गैर-ईरानी जहाजों को होर्मुज से गुजरने की छूट है।
10 लाख लड़ाके तैयार हैं
ईरान ने कहा उसके 10 लाख लड़ाके तैयार हैं और वह होर्मुज को बंद कर सकता है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का दावा है कि अमेरिका ने सैद्धांतिक रूप से होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देने पर सहमति जताई है। फिलहाल ईरान 2 हफ्ते के लिए होर्मुज खोलने को तैयार है, लेकिन नियंत्रण अपनी सेना के पास रखेगा। तेल महंगा होने से रुपये पर दबाव बढ़ेगा। बैंकों और NBFC को उधारी लागत और नकदी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि श्रीराम वेल्थ की रिपोर्ट कहती है कि RBI के हस्तक्षेप से रुपये की गिरावट सीमित रहेगी और 700 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार से मैक्रो स्थिरता बनी रहेगी।