प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को ‘सत्ता की भूखी’ और ‘विश्वासघाती’ पार्टी बताते हुए आरोप लगाया कि उसने तमिलनाडु में अपने लंबे समय के सहयोगी DMK को राजनीतिक स्वार्थ के लिए छोड़ दिया। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस अब सिर्फ सत्ता बचाने और राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए सहारों की तलाश में जुटी है।
बेंगलुरु में कांग्रेस पर जमकर बरसे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर्नाटक के बेंगलुरु में द आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर कई तीखे आरोप लगाए। पीएम ने कहा कि कांग्रेस अवसरवादी राजनीति करती है और जरूरत पड़ने पर अपने सहयोगियों को भी धोखा देने से पीछे नहीं हटती।
DMK को लेकर कही बड़ी बात
अपने भाषण में पीएम मोदी ने तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस और DMK के बीच 25 से 30 साल पुराना रिश्ता रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार DMK ने कांग्रेस को राजनीतिक संकट से बाहर निकालने में मदद की थी। पीएम के मुताबिक, 2014 से पहले केंद्र की सरकार भी काफी हद तक DMK के समर्थन से चलती रही, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदलते ही कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी का साथ छोड़ दिया।
“कांग्रेस सत्ता के लिए करती है विश्वासघात”
प्रधानमंत्री ने कहा कि सत्ता की लालसा में कांग्रेस ने DMK की पीठ में छुरा घोंपा। उन्होंने कांग्रेस को ‘परजीवी पार्टी’ बताते हुए कहा कि अब उसे राजनीति में टिके रहने के लिए लगातार नए सहयोगियों की जरूरत पड़ रही है। पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस अपने नेताओं और सहयोगियों से वादे करती है, लेकिन बाद में उन्हें धोखा दे देती है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और केरल की राजनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस सरकारें आंतरिक विवादों में उलझी हुई हैं। पीएम ने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय पार्टी अपने अंदरूनी समीकरण संभालने में लगी हुई है।
महिला विरोधी होने का भी लगाया आरोप
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर महिला विरोधी राजनीति करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और फैसलों को लेकर लगातार अस्थिरता बनी रहती है। पीएम के मुताबिक, कांग्रेस आज भरोसे की राजनीति नहीं बल्कि अवसरवाद की राजनीति का प्रतीक बन चुकी है।