PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनके बचपन से जुड़े कई पुराने किस्से एक बार फिर चर्चा में हैं। गुजरात के वडनगर में उनके साथ पढ़े दौलत खान पठान ने पीएम मोदी के शुरुआती दिनों की कई यादें साझा की हैं। उनके मुताबिक, दोनों ने वडनगर के प्रेरणा स्कूल में चौथी से सातवीं कक्षा तक साथ पढ़ाई की थी। उस दौर में दोनों परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी आसान नहीं था। जानें गरीबी, स्कूल और RSS से जुड़ी उनकी यादें।
आर्थिक तंगी के बीच बीता बचपन
दौलत खान पठान के मुताबिक, 1960 के दशक में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पिता के निधन के बाद छह सदस्यों वाले परिवार का गुजारा करीब 35 रुपये की पेंशन से होता था। दूसरी तरफ मोदी का परिवार भी सीमित आमदनी में घर चलाता था। पठान बताते हैं कि दोनों परिवार सरकारी राशन के तहत मिलने वाले गेहूं के लिए लाइन में खड़े होते थे। उस समय 20 किलो गेहूं की कीमत 5.25 रुपये बताई गई है। स्थानीय लोगों की मदद से मिलने वाली छाछ भी उनके लिए बड़ी राहत थी। हालात ऐसे थे कि जूते-चप्पल खरीदना मुश्किल था। इसी वजह से दोनों दोस्त कई बार नंगे पैर स्कूल जाया करते थे।
एक रुपये की फीस जुटाने की कहानी
बचपन के दिनों का एक और किस्सा पठान ने बताया। उनके अनुसार, 1961 में दोनों ने डॉ. वसंत पारिख के मार्गदर्शन में RSS से जुड़ने की कोशिश की थी। उस समय पंजीकरण के लिए एक रुपये की जरूरत थी, लेकिन दोनों के पास यह रकम भी नहीं थी। पठान के मुताबिक, नरेंद्र मोदी खुद उनके घर गए और उनकी मां से फीस के पैसे देने के लिए बात की। वहीं पठान ने मोदी की मां हीराबा से एक रुपया देने का आग्रह किया। इस तरह दोनों दोस्तों ने अपनी फीस का इंतजाम किया। हालांकि कुछ दिन बाद पठान की फीस वापस कर दी गई। पठान के मुताबिक, इसकी वजह उनका मुस्लिम परिवार से होना था। उन्होंने बताया कि शुरुआत में मोदी ने भी दोस्त के बिना वहां रहने से इनकार करने की बात कही थी, लेकिन पठान ने उन्हें संगठन से जुड़े रहने के लिए कहा।
पढ़ाई और डिबेट में भी साथ
दोनों की दोस्ती सिर्फ स्कूल आने-जाने तक सीमित नहीं थी। पठान के अनुसार, पढ़ाई के साथ दोनों स्कूल की बहस प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेते थे। बुधवार को होने वाली साप्ताहिक डिबेट में दोनों अक्सर आगे रहते थे। 1965 में पूर्व मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता से जुड़े एक विषय पर हुई बहस के बाद पठान ने मोदी को अखबार पढ़ने और लाइब्रेरी जाने के लिए प्रेरित किया। इसी दौर में डॉ. वसंत पारिख ने भी युवा मोदी को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने में भूमिका निभाई।
सूखे से प्रभावित गांवों तक पहुंचाते थे बाजरा
पठान के मुताबिक, उस समय मोदी और दूसरे स्वयंसेवकों को सूखे से प्रभावित चंपा, नवापुरा और सुल्तानपुरा जैसे गांवों में सब्सिडी वाला बाजरा पहुंचाने का काम भी दिया जाता था। पांच किलो बाजरे की कीमत उस समय दो रुपये बताई गई है। प्रधानमंत्री की आधिकारिक जीवनी में भी उनके वडनगर के शुरुआती जीवन, पढ़ने की रुचि और बहसों में भाग लेने का उल्लेख मिलता है। इसमें बताया गया है कि बचपन में मोदी परिवार की चाय की दुकान पर हाथ बंटाते थे और स्थानीय लाइब्रेरी में काफी समय बिताते थे।
वर्षों बाद फिर हुई बचपन की यादें ताजा
कई साल बाद 2009 में गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान मोदी और पठान ने पुराने दिनों को याद किया। पठान के अनुसार, उस मुलाकात में मोदी ने बचपन की दोस्ती को लेकर मजाक भी किया था। वडनगर से शुरू हुआ मोदी का सफर बाद में RSS के संगठनात्मक काम से होते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। उनकी आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, अहमदाबाद में RSS से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में पूर्णकालिक भूमिका निभाई। दौलत खान पठान की बताई ये यादें उस दौर के वडनगर, दोनों परिवारों की मुश्किलों और स्कूल के दिनों की दोस्ती की एक तस्वीर पेश करती हैं। इन किस्सों में पढ़ाई, बहस, सामाजिक गतिविधियों और रोजमर्रा की आर्थिक चुनौतियों के बीच बीता वह दौर सामने आता है, जो आगे चलकर मोदी के सार्वजनिक जीवन की शुरुआती पृष्ठभूमि का हिस्सा बना।