BRICS SUMMIT 2026: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर भारत की सोच सामने रखी। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। हमारी मान्यता है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। उन्होंने BRICS के जरिए समावेशी वैश्विक विकास, नवाचार, सहयोग और भविष्य की चुनौतियों से निपटने पर जोर दिया।
भारत की संस्कृति में प्रकृति का सम्मान
ओपन सेशन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को मां के रूप में देखा जाता है। इसी सोच के आधार पर विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टिकाऊ विकास के लिए आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
BRICS में बढ़ रहा भरोसा
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS की बढ़ती ताकत, आकर्षण और देशों के बीच बढ़ता विश्वास इस बात का प्रमाण है कि यह मंच अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। ऐसे में BRICS में लचीलापन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
MSME को नए बाजार से जोड़ने की पहल
प्रधानमंत्री ने छोटे उद्यमों को मजबूत करने के लिए BRICS MSME कोऑपरेशन पोर्टल की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए बाजारों से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारों के लिए सहयोग और नए अवसरों का रास्ता खोलना है।
AI और डिजिटल खेती पर फोकस
पीएम मोदी ने डिजिटल कृषि से जुड़ी BRICS पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि BRICS नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर के जरिए AI और जियोस्पेशियल तकनीक को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाएगा। इससे कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
समावेशी विकास पर BRICS का जोर
शिखर सम्मेलन के ओपन सेशन की थीम ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth’ रही। दो दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक विकास, नवाचार, सतत विकास और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई। भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन का समापन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ।