प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल बचाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग का संदेश देते हुए अपने सुरक्षा काफिले की गाड़ियों की संख्या कम करने की पहल की है। इस फैसले के बाद कई बड़े नेताओं ने भी अपने काफिलों में कटौती की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे समय में लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा घेरे में आखिर कौन सी गाड़ियां चलती हैं और हर वाहन की क्या जिम्मेदारी होती है।
ब्लू बुक से सुरक्षा
प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था गृह मंत्रालय की बेहद गोपनीय ब्लू बुक के अनुसार तय की जाती है। इसी दस्तावेज के आधार पर विशेष सुरक्षा समूह प्रधानमंत्री का पूरा कारकेड तैयार करता है। कार्यक्रम स्थल और खतरे के स्तर के अनुसार काफिले की संरचना बदल सकती है। सुरक्षा में शामिल हर वाहन और अधिकारी का काम पहले से तय रहता है ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
इतनी गाड़ियां रहतीं साथ
सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के काफिले में लगभग 18 मुख्य गाड़ियां शामिल रहती हैं। इसके अलावा यातायात नियंत्रण और अतिरिक्त व्यवस्था के लिए 6 से 8 अन्य वाहन भी साथ चलते हैं। कुल मिलाकर करीब 24 गाड़ियों का सुरक्षा घेरा तैयार किया जाता है। इनमें पायलट वाहन एस्कॉर्ट कार जैमर गाड़ी और एंबुलेंस जैसी कई महत्वपूर्ण गाड़ियां शामिल रहती हैं जो अलग अलग जिम्मेदारियां संभालती हैं।
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सबसे सुरक्षित कार कौन
प्रधानमंत्री के काफिले की सबसे महत्वपूर्ण गाड़ी मर्सिडीज मेबैक एस 650 गार्ड मानी जाती है। इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित कारों में गिना जाता है। यह विशेष सुरक्षा तकनीक से लैस वाहन गोलियों और विस्फोट जैसे खतरों का सामना करने की क्षमता रखता है। इसे चलते फिरते सुरक्षा कवच जैसा माना जाता है और किसी भी आपात स्थिति में अंदर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा इसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
तकनीक का सुरक्षा जाल
काफिले में जैमर गाड़ी की भूमिका भी बेहद अहम होती है। इसका काम आसपास मौजूद संदिग्ध संकेतों को बाधित करना होता है ताकि किसी रिमोट उपकरण का इस्तेमाल न हो सके। इसके अलावा बख्तरबंद गाड़ियों में सुरक्षा कमांडो भी मौजूद रहते हैं। ये गाड़ियां मुख्य वाहन को चारों तरफ से सुरक्षा घेरा देकर चलती हैं और हर पल किसी भी खतरे के लिए तैयार रहती हैं।
डमी कारों का खेल
प्रधानमंत्री के काफिले में कई बार एक जैसी दिखने वाली डमी गाड़ियां भी शामिल की जाती हैं। अंतिम समय तक यह जानकारी बेहद गोपनीय रखी जाती है कि प्रधानमंत्री किस वाहन में सवार हैं। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे को भ्रमित करना होता है। सुरक्षा रणनीति का यह हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी कारण प्रधानमंत्री का पूरा काफिला एक मजबूत चलता फिरता सुरक्षा तंत्र माना जाता है।