India refutes claims: अमेरिकी वाणिज्य सचिव के हालिया बयान पर भारत ने कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापार समझौते के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोई फोन नहीं किया था। भारत ने मीडिया में चल रही रिपोर्टों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत तय प्रक्रिया के तहत चल रही है।
व्यापार वार्ता पहले से जारी, गलत हैं दावे
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और अमेरिका ने 13 फरवरी को ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए प्रतिबद्धता जताई थी। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा हुई है। मंत्रालय ने कहा कि बातचीत कई बार निर्णायक मोड़ तक पहुंची, लेकिन खबरों में जिस तरह घटनाक्रम पेश किया गया, वह वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता।
पीएम–ट्रंप बातचीत, व्यापार नहीं था एजेंडा
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 2025 के दौरान कई बार बातचीत हुई है। इन फोन कॉल्स में भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन व्यापार समझौते के लिए कोई विशेष कॉल नहीं किया गया। मंत्रालय ने दोहराया कि दोनों देशों के बीच संवाद संस्थागत ढांचे के तहत हो रहा है।
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ऊर्जा नीति पर भी दो टूक रुख
अमेरिका के प्रस्तावित 500 फीसदी टैरिफ बिल के संदर्भ में भारत ने फिर कहा कि उसकी ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बदलेगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और अपनी आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर सस्ती ऊर्जा के स्रोत तलाशता रहेगा।
संतुलित साझेदारी पर जोर
भारत ने कहा कि वह अमेरिका के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी और संतुलित व्यापार समझौते में रुचि रखता है। सरकार का मानना है कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और बातचीत के जरिए समाधान संभव है। फिलहाल, भारत ने साफ कर दिया है कि कूटनीति अफवाहों से नहीं, तथ्यों और संवाद से चलेगी।