भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर से उभरता दिख रहा है। अमेरिकी सरकार ने भारत समेत 60 से ज्यादा देशों के उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 1 बजे एक उच्च स्तरीय कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें अमेरिका की इस नीति पर भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया पर विचार किया जाएगा। बैठक में कुछ बड़े फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिका ने 50% तक बढ़ाया टैरिफ
अमेरिका ने गुरुवार आधी रात से भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी सीमा शुल्क (Tariff Hike) लगाने का निर्णय लिया है। भारतीय वस्तुओं पर यह टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में खटास आने की आशंका है। अमेरिका का यह कदम चीन और अन्य एशियाई देशों के बढ़ते प्रभाव को कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मसालों से लेकर टेक्सटाइल तक प्रभावित होंगे भारतीय उत्पाद
नई टैरिफ नीति का सबसे बड़ा असर भारत से अमेरिका को होने वाले मसालों, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पादों और मशीनरी पर पड़ सकता है। अमेरिकी व्यापार संघों ने चेतावनी दी है कि इससे अमेरिकी रसोइयों और रेस्तरांओं पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि भारत से आयात होने वाले मसाले महंगे हो जाएंगे। भारत से अमेरिका को हर साल 41 करोड़ डॉलर से अधिक के मसाले निर्यात किए जाते हैं।
अमेरिका ने और किन देशों पर लगाया टैरिफ
टैरिफ नीति केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाले उत्पादों पर 15%, जबकि ताइवान, वियतनाम और बांग्लादेश से आयात होने वाले उत्पादों पर 20% टैक्स लगाया है। इस फैसले के पीछे अमेरिका की रणनीति अपने बाजार को संरक्षित करना और विदेशी निवेश आकर्षित करना बताया जा रहा है।
कृषि और डेयरी उत्पाद बने बड़ी अड़चन
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत काफी समय से चल रही है, लेकिन कृषि और डेयरी उत्पादों को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिका भारतीय बाजार में अपने डेयरी और कृषि उत्पादों की पहुंच चाहता है, लेकिन भारत इससे सहमत नहीं है। पीएम मोदी की आज की बैठक में इस विषय पर भी मंथन होगा कि भारत को किस हद तक लचीलापन दिखाना चाहिए।
भारत की रणनीति तय करने की तैयारी
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में वाणिज्य, विदेश और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। यह बैठक भारत के निर्यातकों को संरक्षण देने और अमेरिका के इस कदम पर कूटनीतिक जवाब तय करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। साथ ही यह भी संभावना है कि भारत कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाने का फैसला कर सकता है।