
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अगस्त को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर बने नए और आधुनिक सरकारी भवन कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया. इस भवन के निर्माण का उद्देश्य सरकार के कई अहम मंत्रालयों और विभागों को एक जगह लाकर, कामकाज को अधिक संगठित, तेज़ और प्रभावी बनाना है. प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि अब मंत्रालयों को आधुनिक सुविधाओं वाले एकीकृत भवन में स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे समन्वय, नवाचार और कार्य दक्षता में वृद्धि होगी.
#WATCH | After the inauguration of Kartavya Bhavan at Kartavya Path in Delhi, Prime Minister Narendra Modi planted a tree on the premises of the building.
— ANI (@ANI) August 6, 2025
(Source: DD News) pic.twitter.com/ThPI1ajNJ0
क्या है ‘कर्तव्य भवन परियोजना’?
कर्तव्य भवन परियोजना के तहत राजधानी दिल्ली में कई बड़े और अत्याधुनिक सरकारी कार्यालय भवन बनाए जा रहे हैं. इन भवनों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि एक ही परिसर में कई मंत्रालय और विभाग एक साथ काम कर सकें. यह योजना सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है पुराने और बिखरे सरकारी दफ्तरों को हटाकर उन्हें आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल भवनों में एकत्रित करना.
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कर्तव्य भवन-3 में कौन-कौन से मंत्रालय होंगे?
कर्तव्य भवन-3 में सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालय और विभाग शिफ्ट किए जाएंगे. जैसे- गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम), कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग (DoPT), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) का कार्यालय. इन मंत्रालयों को एक ही जगह पर लाने से विभागों के बीच बेहतर तालमेल और फैसलों की गति में सुधार आएगा. साथ ही कर्मचारियों और नागरिकों दोनों को कामकाज में सुविधा होगी.
आगे की योजना क्या है?
सरकार का लक्ष्य है कि कर्तव्य भवन-1 और भवन-2 को भी अगले महीने तक तैयार कर लिया जाए. इनका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और फिनिशिंग का काम चल रहा है. इसके बाद कर्तव्य भवन-6 और 7 का निर्माण कार्य शुरू होगा, जिन्हें अक्टूबर 2026 तक पूरा करने की योजना है.
क्यों ज़रूरी हैं ये बदलाव?
अब तक कई मंत्रालय और विभाग राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में पुराने और असुविधाजनक भवनों में काम कर रहे थे. इससे न सिर्फ संचार और तालमेल में दिक्कत होती थी, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ता था. नए कर्तव्य भवनों से न सिर्फ यह समस्याएं खत्म होंगी, बल्कि यह भवन ऊर्जा-सक्षम, हरित निर्माण (Green Building) और डिजिटल रूप से सक्षम होंगे. साथ ही यह दिल्ली के केंद्र में एक नया प्रशासनिक हब तैयार करेंगे.